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धार्मिक

(भाग-54) गीता में सस्ती लोकप्रियता का त्याग और निस्वार्थ सेवा कर्म का महत्व समझाया है?

निस्वार्थ एवं निष्काम सेवा कर्म करने जाओ तो ‘बंधन’ ही है। निष्काम कर्म करने से यह संसार अच्छी तरह से चलता है। वास्तव में निष्काम व निस्वार्थ सेवा कर्म, ‘खुद कौन है’ वह नक्की हुए बगैर हो ही नहीं सकता। जब तक क्रोध-मान-माया-लोभ हों, तब तक निष्काम कर्म किस तरह हो सकता है? मनुष्य खुद ही मानता है कि ‘यह …

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(भाग-53) भगवान चराचर जगत के निर्माता घटघत वासी और सर्व व्यापक परमात्मा पुरुषोत्तम है

भाग:53) भगवान चराचर जगत के निर्माता घटघत वासी और सर्व व्यापक परमात्मा पुरुषोत्तम है टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:सह-संपादक की रिपोर्ट श्री कृष्ण भगवान बोले हे पार्थ ! मुझमे मन लगा करके मेरे ही आश्रय होकर योगाभ्यास करते हुए मेरे स्वरूप का संशय रहित पूर्णज्ञान होगा सो सुनो विज्ञान के सहित वह पूर्णज्ञान मैं तुम्हें सुनाता हूँ जिसके जानने से तुमको इस …

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(भाग-52)अंतर्यामी सर्व व्यापक होने कारण सब प्राणियों में शुभ और अशुभ कर्मानुसार शासन करता है

भावार्थ : श्रीमद-भगवद गीता अध्याय 8 के अनुसार जो पुरुष सर्वज्ञ, अनादि, सबके नियंता (अंतर्यामी रूप से सब प्राणियों के शुभ और अशुभ कर्म के अनुसार शासन करने वाला) सूक्ष्म से भी अति सूक्ष्म, सबके धारण-पोषण करने वाले अचिन्त्य-स्वरूप, सूर्य के सदृश नित्य चेतन प्रकाश रूप और अविद्या से अति परे, शुद्ध सच्चिदानन्दघन परमेश्वर का स्मरण करता है॥ अर्जुन उवाच …

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(भाग-51)भवसागर से पार के लिए श्रीमद-भगवद गीता का अनुसरण,अनुकरण और अनुगमन जरुरी है

गीता जयंती पर श्रीराधा कृष्ण सेवा समिति की ओर से आयोजित संकीर्तन में योगीराज भगवान श्रीकृष्ण की महिमा का बखान किया गया। वक्ताओं ने भवसागर से पार जाने के लिए गीता के श्लोकों का अनुसरण अनुकरण और अनुगमन करने पर जोर दिया है। सोमवार को गीता मंदिर प्रांगण में प्रथम में संकीर्तन का आयोजन किया गया। श्रद्घालुओं को भगवान श्रीकृष्ण …

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केदारनाथ यात्रा गौरीकुंड में बारिश से तबाही : 19 लोग लापता?

केदारनाथ। केदारनाथ मार्ग पर स्थित गौरीकुंड बस स्टेशन के नजदीक देर रात वज्रपात होने से पहाड़ी दरक गई. पहाड़ी से गिरे बोल्डरों की चपेट में सोनप्रयाग-गौरीकुंड मोटरमार्ग के किनारे स्थित तीन से चार दुकानें भी आ गईं. केदारनाथ यात्रा के सबसे मुख्य पड़ाव गौरीकुंड में गुरुवार देर रात बड़ा हादसा हो गया. पहाड़ी दरकने के कारण यहां तीन चार दुकाने …

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(भाग-50) परिवर्तनशील संसार मे परम् पिता परमात्मा के शिवाय यहां कोई किसी का नहीं है

श्रीमद-भगवद गीता के अनुसार परिवर्तन ही संसार का नियम है इस बात से बस वही असहमत हो सकता है जिसमे सोचने और समझने की क्षमता ना हो. जब से मनुष्य का जन्म होता है तब से वो अपने आस पास अगर कुछ देखता है तो वो परिवर्तन के सिवा और कुछ नहीं होता. तो इस बात से असहमति का तो …

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(भाग-49) मनुष्य श्रद्धापूर्वक आत्म-साक्षात्कार की विधि ग्रहण करता है वही सिद्ध योगी कहलाता है

  ✍️टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:सह-संपादक की रिपोर्ट वह व्यक्ति आत्म-साक्षात्कार को प्राप्त तथा योगी कहलाता है जो अपने अर्जित ज्ञान तथा अनुभूति से पूर्णतया सन्तुष्ट रहता है। ऐसा व्यक्ति अध्यात्म को प्राप्त तथा जितेन्द्रिय कहलाता है। वह सभी वस्तुओं को—चाहे वे कंकड़ हों, पत्थर हों या कि सोना—एकसमान देखता और समझताञहै। अर्जुन उवाच अयतिः श्रद्धयोपेतो योगच्चलितमानसः | अप्राप्य योगसंसिद्धिं कां कृष्ण …

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(भाग-48) ईश्वर पर पूर्ण विश्वास एवं समर्पण भाव से होगा संसारिक कलह-क्लेशों का नाश

  ✍️टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:सह-संपादक की रिपोर्ट गीता में भी भगवान कृष्ण ने मन को चंचल बताया है तथा उसे स्थिर करने के लिए अभ्यास और वैराग्य की बात कही है। भगवान व्यासदेवजी ने अभ्यास और वैराग्य को रूपक के माध्यम से बड़े ही सुन्दर ढंग से वर्णन किया है । चित्त एक नदी है, जिसमें वृत्तियों का प्रवाह बहता है …

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(भाग-47) गीता अध्ययन पठन पाठन और मनन से उज्ज्वल भविष्य के चमत्कारी लाभ।

वैदिक सनातन हिन्दू धर्म में श्रीमद्-भगवत गीता को एक विशेष स्थान प्राप्त है। गीता हिंदू धर्म का बहुत ही पवित्र धर्मग्रंथ है। आज यह केवल भारत तक सीमित नहीं रह गई है बल्कि देश-विदेश में भी गीता का पाठ करने वाले लोगों की संख्या बढ़ी है। गीता ने कितने ही लोगों को जीवन दर्शन एवं उज्जवल का एहसास कराया है। …

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जानिए शिव-शंकर-बाबा-बम-बम भोलेनाथ के शिवलिंग पर दूध चढाने का वैज्ञानिक महत्व

जानिए शिव-शंकर-बाबा-बम-बम भोलेनाथ के शिवलिंग में दूध चढाने का वैज्ञानिक महत्व टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:सह-संपादक की रिपोर्ट बम बम भोलेनाथ के शिवलिंग पर कच्चा दूध चढ़ाने के वैज्ञानिक कारण यह है कि शिव मंदिर में कई तरह के लोगों का आगमन होता है और यहां सकारात्मक के साथ नकारात्मक ऊर्जा भी समान रूप से जमा होती है और शिवलिंग पर लगातार …

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