श्रीमद-भगवद गीता के अनुसार परिवर्तन ही संसार का नियम है इस बात से बस वही असहमत हो सकता है जिसमे सोचने और समझने की क्षमता ना हो. जब से मनुष्य का जन्म होता है तब से वो अपने आस पास अगर कुछ देखता है तो वो परिवर्तन के सिवा और कुछ नहीं होता. तो इस बात से असहमति का तो …
Read More »(भाग-49) मनुष्य श्रद्धापूर्वक आत्म-साक्षात्कार की विधि ग्रहण करता है वही सिद्ध योगी कहलाता है
✍️टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:सह-संपादक की रिपोर्ट वह व्यक्ति आत्म-साक्षात्कार को प्राप्त तथा योगी कहलाता है जो अपने अर्जित ज्ञान तथा अनुभूति से पूर्णतया सन्तुष्ट रहता है। ऐसा व्यक्ति अध्यात्म को प्राप्त तथा जितेन्द्रिय कहलाता है। वह सभी वस्तुओं को—चाहे वे कंकड़ हों, पत्थर हों या कि सोना—एकसमान देखता और समझताञहै। अर्जुन उवाच अयतिः श्रद्धयोपेतो योगच्चलितमानसः | अप्राप्य योगसंसिद्धिं कां कृष्ण …
Read More »(भाग-48) ईश्वर पर पूर्ण विश्वास एवं समर्पण भाव से होगा संसारिक कलह-क्लेशों का नाश
✍️टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:सह-संपादक की रिपोर्ट गीता में भी भगवान कृष्ण ने मन को चंचल बताया है तथा उसे स्थिर करने के लिए अभ्यास और वैराग्य की बात कही है। भगवान व्यासदेवजी ने अभ्यास और वैराग्य को रूपक के माध्यम से बड़े ही सुन्दर ढंग से वर्णन किया है । चित्त एक नदी है, जिसमें वृत्तियों का प्रवाह बहता है …
Read More »(भाग-47) गीता अध्ययन पठन पाठन और मनन से उज्ज्वल भविष्य के चमत्कारी लाभ।
वैदिक सनातन हिन्दू धर्म में श्रीमद्-भगवत गीता को एक विशेष स्थान प्राप्त है। गीता हिंदू धर्म का बहुत ही पवित्र धर्मग्रंथ है। आज यह केवल भारत तक सीमित नहीं रह गई है बल्कि देश-विदेश में भी गीता का पाठ करने वाले लोगों की संख्या बढ़ी है। गीता ने कितने ही लोगों को जीवन दर्शन एवं उज्जवल का एहसास कराया है। …
Read More »जानिए शिव-शंकर-बाबा-बम-बम भोलेनाथ के शिवलिंग पर दूध चढाने का वैज्ञानिक महत्व
जानिए शिव-शंकर-बाबा-बम-बम भोलेनाथ के शिवलिंग में दूध चढाने का वैज्ञानिक महत्व टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:सह-संपादक की रिपोर्ट बम बम भोलेनाथ के शिवलिंग पर कच्चा दूध चढ़ाने के वैज्ञानिक कारण यह है कि शिव मंदिर में कई तरह के लोगों का आगमन होता है और यहां सकारात्मक के साथ नकारात्मक ऊर्जा भी समान रूप से जमा होती है और शिवलिंग पर लगातार …
Read More »(भाग-46) श्रीमद्-भगवत गीता में कर्म योग,भक्ति ज्ञान वैराग्य एवं जन्म मृत्यु के बंधन से मोक्ष के रास्ते
वैैदिक सनातन धर्म ग्रंथों में गीता को जीवन प्रबंधन की पुस्तक माना गया है। महाभारत युद्ध के प्रारंभ में कुरुक्षेत्र में पांडव और कौरव सेना के बीच खड़े होकर भगवान कृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था। गीता मोक्ष का मार्ग दिखाती है। अब तो मैनेजमेंट स्कूल्स में गीता के जरिए मैनेजमेंट सूत्र पढ़ाए जा रहे हैं। गीता …
Read More »(भाग-45) श्रीमद-भगवद गीता मे योग का अर्थ है जोडना,ध्यान और भौतिक मुद्राओं का पालन
आमतौर पर कई लोगों द्वारा समझा जाता है कि योग का अर्थ जोडना, ध्यान और भौतिक मुद्राओं का पालन करना है। लेकिन यह श्रीमद्भगवद्गीता में इससे परे वर्णित है, जो विभिन्न प्रक्रियाओं पर वर्णन करता है जिसमें शाश्वत शांति के लिए आध्यात्मिकता के महत्व सहित, कुछ उत्तरों के ज्ञान को जानने के लिए योग और इसकी प्रक्रिया को परिभाषित …
Read More »(भाग-44) भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को मोह और धर्म संकट की दुविधा निवारणार्थ करते है समाधान
✍️टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:सह-संपादक की रिपोर्ट भगवत गीता के दूसरे अध्याय को आसान शब्दों में समझते हैं, हमने पहले अध्याय में अर्जुनविषादयोग अर्थात अर्जुन के विषाद, उनके दुख, उनकी दुविधा के बारे में जाना था, इस अध्याय में श्री कृष्ण द्वारा अर्जुन की इस दुविधा का उत्तर दिया जाता है और इस अध्याय का नाम सांख्य योग है। इस अध्याय …
Read More »(भाग-43) निराकार ब्रह्म तथा साकार ब्रम्ह की भक्ति मे क्या फर्क है जानिए?
✍️टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:सह-संपादक की रिपोर्ट गीता मे साकार ब्रम्ह भक्ति साधना और निराकार ब्रह्म की उपासना में?क्या अंतर है आइये जानते हैं भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन क्या समझाया अर्जुन को गीता के बारहवें अध्याय भक्ति योग में क्या फर्क है निर्गुण और सगुण के उपासना में? भगवत गीता में अर्जुन ने भगवान श्री कृष्ण से ये ही सवाल …
Read More »(भाग-42) जो राग द्वेष रहित अहिंसावादी धैर्य और सिद्धि असिद्धिमे निर्विकार है,वह सात्त्विक है।
भाग:42) जो राग-द्वेष रहित अहिंसावादी धैर्य और सिद्धि और असिद्धि में निर्विकार है, वह सात्त्विक है। टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:सह-संपादक की रिपोर्ट श्रीमद-भगवद के अनुसार कर्ता रागद्वेष रहित, अहिंसावादी, धैर्य और उत्साहयुक्त तथा सिद्धि और असिद्धिमें निर्विकार है, वह सात्त्विक कहा जाता है। ।। 18.26।। जो कर्ता संगरहित, अहंमन्यता से रहित, धैर्य और उत्साह से युक्त एवं कार्य की सिद्धि (सफलता) …
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