रक्षाबंधन सण 30 आणि 31 ऑगस्ट रोजी साजरा केला जाणार आहे. पौर्णिमा तिथी दोन दिवस कारण 30 रोजी सकाळी 11 ते दुसऱ्या दिवशी सकाळी 7.37 पर्यंत असेल. त्यामुळे राखी बांधण्यासाठी दोन मुहूर्त असतील. बीएचयूच्या ज्योतिष विभागाचे प्रमुख प्रा. गिरीजाशंकर शास्त्री सांगतात की, रक्षाबंधनाची सर्वोत्तम वेळ ३० ऑगस्टच्या रात्री ९ ते ९.५४ पर्यंत आहे, मात्र ११.१३ पर्यंत राखी बांधता येईल. त्याचवेळी …
Read More »(भाग-75) श्रीमद्-गीता में श्रीकृष्ण के विश्वरूप योग दर्शन के लिए अर्जुन भगवान से प्रार्थना करते हैं
भाग:75) श्रीमद्-गीता में श्रीकृष्ण के विश्वरूप योग दर्शन के लिए अर्जुन भगवान से प्रार्थना करते हैं टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:सह-संपादक की रिपोर्ट भगवान के अनेक मुख और नेत्रों से युक्त, अनेक अद्भुत दर्शनों वाले, बहुत से दिव्य भूषणों से युक्त और बहुत से दिव्य शस्त्रों को धारण किए हुए और दिव्य गंध का सारे शरीर में लेप किए हुए, सब प्रकार …
Read More »(भाग-74) प्रकृति परब्रम्ह परमात्मा अनन्त अगोचर अविनाशी और सर्व व्यापक ब्रह्म स्वरूप है
भाग:74) प्रकृति परब्रम्ह परमात्मा अनन्त अगोचर अविनाशी और सर्व व्यापक ब्रह्म स्वरूप है टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:सह-संपादक की रिपोर्ट तेषां सततयुक्तानां भजतां प्रीतिपूर्वकम् । ददामि बुद्धियोगं तं येन मामुपयान्ति ते ॥ १०-१०॥ उन निरंतर मेरे ध्यान आदि में लगे हुए और प्रेमपूर्वक भजने वाले भक्तों को मैं वह तत्त्वज्ञानरूप योग देता हूँ, जिससे वे मुझको ही प्राप्त होते हैं॥ अथ दशमोऽध्याय:- …
Read More »श्रावण सोमवार व्रत : कैसे करें पूजन, क्या है सरल विधि और कथा?
जानिए…श्रावण सोमवार आसान पूजन विधि :- * श्रावण सोमवार को ब्रह्म मुहूर्त में सोकर उठें। * पूरे घर की सफाई कर स्नानादि से निवृत्त हो जाएं। * गंगा जल या पवित्र जल पूरे घर में छिड़कें। * घर में ही किसी पवित्र स्थान पर भगवान शिव की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। * पूरी पूजन तैयारी के बाद निम्न मंत्र …
Read More »(भाग-73) गीता में श्रीकृष्ण कहते हैं कि प्रेम पूर्वक भजने वाले भक्तों को मैं तत्वज्ञान रुप योग देता हूं
भाग:73) गीता में श्रीकृष्ण कहते हैं कि प्रेम पूर्वक भजने वाले भक्तों को मैं तत्वज्ञान रुप योग देता हूं टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:सह-संपादक की रिपोर्ट दसवें अध्याय के अर्थ-चिन्तन का यह परिणाम हुआ है कि यह सब भूतों में स्थित शङ्ख-चक्रधारी भगवान् विष्णुका सदा ही दर्शन करता रहता है। इसकी स्नेहपूर्ण दृष्टि जब कभी किसी देहधारी के शरीर पर पड़ जाती …
Read More »(भाग-72) मन की दिव्य शक्तियों को किस प्रकार ब्रह्ममय बनाया जाए इसकी युक्ति है राजविधा योग
भाग:72) मन की दिव्य शक्तियों को किस प्रकार ब्रह्ममय बनाया जाए इसकी युक्ति है राजविधा योग टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:सह-संपादक की रिपोर्ट श्रीमद-भगवद गीता के नौवें अध्याय को राजगुह्ययोग कहा गया है, अर्थात् यह अध्यात्म विद्या विद्याराज्ञी है और यह गुह्य ज्ञान सबमें श्रेष्ठ है। राजा शब्दका एक अर्थ मन भी था। अतएव मन की दिव्य शक्तियों को किस प्रकार ब्रह्ममय …
Read More »(भाग-71) भगवत चिंतन करता हुआ मनुष्य परम प्रकाश रूप ईश्वर के दिव्य स्वरुपको ही प्राप्त हो जाता है॥
भाग:71) भगवत चिंतन करता हुआ मनुष्य परम प्रकाश रूप ईश्वर के दिव्य स्वरुपको ही प्राप्त हो जाता है॥ टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:सह-संपादक की रिपोर्ट भगवान शिव कहते हैं:- हे देवी ! अब गीता के आठवें अध्याय का माहात्म्य सुनो, उसके सुनने से तुम्हें बड़ी प्रसन्नता होगी, लक्ष्मीजी के पूछने पर भगवान विष्णु ने उन्हें इस प्रकार आठवें अध्याय का माहात्म्य बतलाया …
Read More »(भाग-70) श्रीमद-भगवद गीता के अनुसार जगत की निर्मिति पुरुषत्व और प्रकृति के द्धारा होती है
(भाग-70) श्रीमद-भगवद गीता के अनुसार जगत की निर्मिति पुरुषत्व और प्रकृति के द्धारा होती है टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:सह-संपादक की रिपोर्ट गीता के अनुसार जगत की निर्मिति पुरुषत्व और प्रकृति के द्वारा होती है. पुरुषत्व अचल है, निराकार है, निर्विकार है. उसीके कारण प्रकृति को शक्ति प्राप्त होती है जिससे वह जगत का निर्माण कर सकती है. सांख्य दर्शन में जिसे …
Read More »(भाग-69) श्रीमद-भगवदगीता नित्य अध्ययन- चिंतन-मनन के आलौकिक और चमत्कारी फायदे
(भाग-69) श्रीमद-भगवदगीता नित्य अध्ययन- चिंतन-मनन के आलौकिक और चमत्कारी फायदे टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:सह-संपादक की रिपोर्ट घर में भगवद गीता जरूर रखनी चाहिए और रोजाना इसका अध्ययन मनन चिंतन पाठ भी करना चाहिए। भगवद गीता का पाठ करने से जीवन की कई समस्याओं का हल मिलता है। भगवद गीता का पाठ करने से व्यक्ति में न सिर्फ सोचने समझने की क्षमता …
Read More »(भाग-68) श्रीमद-भगवद गीता का माहात्म्य सुनकर कानों में अमृत-राशि भर जाती है।
भाग:68) श्रीमद-भगवद गीता का माहात्म्य सुनकर कानों में अमृत-राशि भर जाती है। टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:सह-संपादक की रिपोर्ट श्रीमद-भगवद का महात्म्य सुनकर मनुष्य अज्ञान अंधकार से निकलकर प्रकाश रुपी ज्ञान को प्राप्त हो जाता है । गंगा किनारे पाटलीपुत्र नामक एक दुर्गम नगर है, जिसका गोपुर (द्वार ) बहुत ही ऊँचा है। उस नगर में शङ्ककर्ण नामक एक ब्राह्मण रहता था, …
Read More »
विश्वभारत News Website