टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:सह-संपादक की रिपोर्ट श्रीमद-भगवद गीता के अनुसार मनुष्य जीवन का लक्ष्य मोक्ष प्राप्त करना है, जीवन और मृत्यु के चक्कर से बचना, निष्काम कर्म का अगला कदम वही होगा, श्रीकृष्ण यही कहते हैं की जो मनुष्य दोष, दृष्टि से रहित और श्रद्धा युक्त होकर मेरे इस मत का सदा ही अनुसरण करेगा, वह सारे कर्मों के बंधन …
Read More »(भाग-58) श्रीमद-भगवद गीता के अनुसार मृत्यू के समय मनुष्य जिस अवस्था में होगा उसमें प्रवेश करेगा
भाग:58) श्रीमद-भगवद गीता के अनुसार मृत्यू के समय मनुष्य जिस अवस्था में होगा उसमें प्रवेश करेगा टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:सह-संपादक की रिपोर्ट भगवद गीता में श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अक्षर ब्रह्मं योग के बारे में बताया है।अर्जुन ने कृष्ण से आग्रह किया कि वे स्वयं, भगवान और कर्म की प्रकृति के बारे में बताएं। वह कृष्ण से यह भी पूछता है …
Read More »(भाग-57) गीता के अनुसार मन को एकाग्र करके अंन्त:करण की शुद्धि के लिए योग अभ्यास करें।
भाग:57) गीता के अनुसार मन को एकाग्र करके अंन्त:करण की शुद्धि के लिए योग अभ्यास करें। टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:सह-संपादक की रिपोर्ट भावार्थ : उस आसन पर बैठकर चित्त और इन्द्रियों की क्रियाओं को वश में रखते हुए मन को एकाग्र करके अन्तःकरण की शुद्धि के लिए योग का अभ्यास करे॥ समं कायशिरोग्रीवं धारयन्नचलं स्थिरः । भावार्थ : काया, सिर और …
Read More »(भाग-56) गीता ज्ञान का सागर है जिसमें गोता लगाकर मनुष्य भवसागर से पार हो जाता है।
भाग: 56) गीता ज्ञान का अथाह सागर है जिसमें गोता लगाकर मनुष्य भवसागर से पार हो जाता है टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:सह-संपादक की रिपोर्ट श्रीमद-भगवद गीता के अनुसार जैसे अनेक प्रकार की नदियों के जल सब ओर से परिपूर्ण अचल प्रतिष्ठा वाले समुद्र में उसको विचलित न करते हुए ही समा जाते हैं, वैसे ही सब भोग जिस स्थितप्रज्ञ पुरुष में …
Read More »(भाग-55) गीता के अनुसार सदैव मोह और संदेह करने वाला व्यक्ति कभी प्रसन्न नहीं रह सकता है।
गीता की बातों को अपनाने से व्यक्ति जीवन में खूब तरक्की करता है. इन बातों का अनुसरण करने से व्यक्ति के अंदर से क्रोध और ईर्ष्या की भावना खत्म होती है श्रीमद्-भगवत गीता में भगवान कृष्ण के उपदेशों का वर्णन है. गीता के ये उपदेश श्रीकृष्ण ने महाभारत युद्ध के दौरान अर्जुन को दिए थे. गीता में दिए उपदेश आज …
Read More »(भाग-54) गीता में सस्ती लोकप्रियता का त्याग और निस्वार्थ सेवा कर्म का महत्व समझाया है?
निस्वार्थ एवं निष्काम सेवा कर्म करने जाओ तो ‘बंधन’ ही है। निष्काम कर्म करने से यह संसार अच्छी तरह से चलता है। वास्तव में निष्काम व निस्वार्थ सेवा कर्म, ‘खुद कौन है’ वह नक्की हुए बगैर हो ही नहीं सकता। जब तक क्रोध-मान-माया-लोभ हों, तब तक निष्काम कर्म किस तरह हो सकता है? मनुष्य खुद ही मानता है कि ‘यह …
Read More »(भाग-53) भगवान चराचर जगत के निर्माता घटघत वासी और सर्व व्यापक परमात्मा पुरुषोत्तम है
भाग:53) भगवान चराचर जगत के निर्माता घटघत वासी और सर्व व्यापक परमात्मा पुरुषोत्तम है टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:सह-संपादक की रिपोर्ट श्री कृष्ण भगवान बोले हे पार्थ ! मुझमे मन लगा करके मेरे ही आश्रय होकर योगाभ्यास करते हुए मेरे स्वरूप का संशय रहित पूर्णज्ञान होगा सो सुनो विज्ञान के सहित वह पूर्णज्ञान मैं तुम्हें सुनाता हूँ जिसके जानने से तुमको इस …
Read More »(भाग-52)अंतर्यामी सर्व व्यापक होने कारण सब प्राणियों में शुभ और अशुभ कर्मानुसार शासन करता है
भावार्थ : श्रीमद-भगवद गीता अध्याय 8 के अनुसार जो पुरुष सर्वज्ञ, अनादि, सबके नियंता (अंतर्यामी रूप से सब प्राणियों के शुभ और अशुभ कर्म के अनुसार शासन करने वाला) सूक्ष्म से भी अति सूक्ष्म, सबके धारण-पोषण करने वाले अचिन्त्य-स्वरूप, सूर्य के सदृश नित्य चेतन प्रकाश रूप और अविद्या से अति परे, शुद्ध सच्चिदानन्दघन परमेश्वर का स्मरण करता है॥ अर्जुन उवाच …
Read More »(भाग-51)भवसागर से पार के लिए श्रीमद-भगवद गीता का अनुसरण,अनुकरण और अनुगमन जरुरी है
गीता जयंती पर श्रीराधा कृष्ण सेवा समिति की ओर से आयोजित संकीर्तन में योगीराज भगवान श्रीकृष्ण की महिमा का बखान किया गया। वक्ताओं ने भवसागर से पार जाने के लिए गीता के श्लोकों का अनुसरण अनुकरण और अनुगमन करने पर जोर दिया है। सोमवार को गीता मंदिर प्रांगण में प्रथम में संकीर्तन का आयोजन किया गया। श्रद्घालुओं को भगवान श्रीकृष्ण …
Read More »केदारनाथ यात्रा गौरीकुंड में बारिश से तबाही : 19 लोग लापता?
केदारनाथ। केदारनाथ मार्ग पर स्थित गौरीकुंड बस स्टेशन के नजदीक देर रात वज्रपात होने से पहाड़ी दरक गई. पहाड़ी से गिरे बोल्डरों की चपेट में सोनप्रयाग-गौरीकुंड मोटरमार्ग के किनारे स्थित तीन से चार दुकानें भी आ गईं. केदारनाथ यात्रा के सबसे मुख्य पड़ाव गौरीकुंड में गुरुवार देर रात बड़ा हादसा हो गया. पहाड़ी दरकने के कारण यहां तीन चार दुकाने …
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