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धार्मिक

(भाग-72) मन की दिव्य शक्तियों को किस प्रकार ब्रह्ममय बनाया जाए इसकी युक्ति है राजविधा योग

भाग:72) मन की दिव्य शक्तियों को किस प्रकार ब्रह्ममय बनाया जाए इसकी युक्ति है राजविधा योग टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:सह-संपादक की रिपोर्ट श्रीमद-भगवद गीता के नौवें अध्याय को राजगुह्ययोग कहा गया है, अर्थात् यह अध्यात्म विद्या विद्याराज्ञी है और यह गुह्य ज्ञान सबमें श्रेष्ठ है। राजा शब्दका एक अर्थ मन भी था। अतएव मन की दिव्य शक्तियों को किस प्रकार ब्रह्ममय …

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(भाग-71) भगवत चिंतन करता हुआ मनुष्य परम प्रकाश रूप ईश्वर के दिव्य स्वरुपको ही प्राप्त हो जाता है॥

भाग:71) भगवत चिंतन करता हुआ मनुष्य परम प्रकाश रूप ईश्वर के दिव्य स्वरुपको ही प्राप्त हो जाता है॥ टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:सह-संपादक की रिपोर्ट भगवान शिव कहते हैं:- हे देवी ! अब गीता के आठवें अध्याय का माहात्म्य सुनो, उसके सुनने से तुम्हें बड़ी प्रसन्नता होगी, लक्ष्मीजी के पूछने पर भगवान विष्णु ने उन्हें इस प्रकार आठवें अध्याय का माहात्म्य बतलाया …

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(भाग-70) श्रीमद-भगवद गीता के अनुसार जगत की निर्मिति पुरुषत्व और प्रकृति के द्धारा होती है

(भाग-70) श्रीमद-भगवद गीता के अनुसार जगत की निर्मिति पुरुषत्व और प्रकृति के द्धारा होती है टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:सह-संपादक की रिपोर्ट गीता के अनुसार जगत की निर्मिति पुरुषत्व और प्रकृति के द्वारा होती है. पुरुषत्व अचल है, निराकार है, निर्विकार है. उसीके कारण प्रकृति को शक्ति प्राप्त होती है जिससे वह जगत का निर्माण कर सकती है. सांख्य दर्शन में जिसे …

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(भाग-69) श्रीमद-भगवदगीता नित्य अध्ययन- चिंतन-मनन के आलौकिक और चमत्कारी फायदे

(भाग-69) श्रीमद-भगवदगीता नित्य अध्ययन- चिंतन-मनन के आलौकिक और चमत्कारी फायदे टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:सह-संपादक की रिपोर्ट घर में भगवद गीता जरूर रखनी चाहिए और रोजाना इसका अध्ययन मनन चिंतन पाठ भी करना चाहिए। भगवद गीता का पाठ करने से जीवन की कई समस्याओं का हल मिलता है। भगवद गीता का पाठ करने से व्यक्ति में न सिर्फ सोचने समझने की क्षमता …

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(भाग-68) श्रीमद-भगवद गीता का माहात्म्य सुनकर कानों में अमृत-राशि भर जाती है।

भाग:68) श्रीमद-भगवद गीता का माहात्म्य सुनकर कानों में अमृत-राशि भर जाती है। टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:सह-संपादक की रिपोर्ट श्रीमद-भगवद का महात्म्य सुनकर मनुष्य अज्ञान अंधकार से निकलकर प्रकाश रुपी ज्ञान को प्राप्त हो जाता है । गंगा किनारे पाटलीपुत्र नामक एक दुर्गम नगर है, जिसका गोपुर (द्वार ) बहुत ही ऊँचा है। उस नगर में शङ्ककर्ण नामक एक ब्राह्मण रहता था, …

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(भाग-68) गीता का पाठ करने से व्यक्ति जीवन की कई परेशानियों से छुटकारा पा सकता है।

(भाग-68) गीता का पाठ करने से व्यक्ति जीवन की कई परेशानियों से छुटकारा पा सकता है। ✍️टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:सह-संपादक की रिपोर्ट श्रीमद-भगवद गीता की रचना इतनी सरल और सुन्दर है कि थोड़ा अभ्यास करने से भी मनुष्य इसको सहज ही समझ सकता है, परंतु इसका आशय इतना गूढ़ और गम्भीर है कि आजीवन निरन्तर अभ्यास करते रहने पर भी उसका …

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नाशिकच्या त्र्यंबकेश्वर मंदिरात भाविकांची गर्दी :श्रावणी सोमवार, दर्शनासाठी रांगाच रांगा

पहिल्या श्रावणी सोमवार निमित्ताने नाशिकच्या त्र्यंबकेश्वर मंदिरात भाविकांची प्रचंड गर्दी झाली आहे. नाशिक जिल्ह्यासह देशभरातून हजारो भाविक दर्शनासाठी दाखल झाले आहेत. त्यामुळे मंदिर परिसर भाविकांच्या गर्दीने फुलला आहे. त्र्यंबकराजाच्या दर्शनासाठी भाविक कुटुंबासह दाखल झाले आहेत. त्यामुळे मंदिरात दर्शनाच्या रांगाच रांगा लागल्या आहेत. मंदिर परिसरात प्रशासनानेही लक्ष केंद्रित केले असून चोख बंदोबस्त आहे.

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अदभुत पवित्र, विस्मय, विहंगम और श्रद्धा का स्थान है हेमकुंड साहिब गुरुद्धारा

अदभुत पवित्र, विस्मय, विहंगम और श्रद्धा का स्थान है हेमकुंड साहिब गुरुद्धारा टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:सह-संपादक की रिपोर्ट हिमालय की हसीन हरीतकी विहंगम वादियों में स्थित गुरुद्वारा हेमकुंड साहिब सिखों के सबसे पवित्र स्थानों में से एक माना जाता है। इसकी सुंदरता किसी का भी मन मोह सकती है। माना जाता है कि यहाँ पर सिखों के दसवें और अंतिम गुरु …

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पचमढी के रहस्यमयी नाग मंदिर के दर्शनार्थ लाखों श्रद्धालुओं का उमडा सैलाब

✍️टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:सह-संपादक की रिपोर्ट पचमढी : मध्यप्रदेश के होशंगाबाद और छिन्दवाडा जिले की सीमा में स्थित विहंगम सतपुडा यानी 7 गगनचुम्बी शिखर पर रहस्यमयी जागरुक नाग मंदिर देवस्थान हैं। इस मंदिर से कई रहस्य जुड़े हुए हैं। ये मंदिर साल में सिर्फ 10 दिन के लिए सावन मास में खुलता है। इस दौरान यहां बड़ी संख्या में श्रृद्धालु आते …

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(भाग-67) गीता संपूर्ण मानव जगत में दैविक, अधिभौतिक और आत्म कल्याण की संजीवनी है

भाग :67) गीता संपूर्ण मानव जगत में दैविक, अधिभौतिक और आत्म कल्याण की संजीवनी है टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:सह-संपादक की रिपोर्ट श्रीमद्भगवद्गीता का महत्व सम्पूर्ण मानव लोक के लिए प्रासंगिक है। श्रीमद भगवतगीता ही एक ऐसा ग्रन्थ है जिसमें सृष्टि के सम्पर्ण आध्यात्मिक पक्षों का समावेश किया गया है। वेदों और उपनिषदों से लेकर शंकराचार्य तक के सभी मतों व मान्यताओं …

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