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धार्मिक

(भाग:87) काम क्रोध मद लोभ मोह मत्सर का त्याग करने वाला महापुरुष के समान

भाग:87) काम क्रोध मद लोभ मोह मत्सर का त्याग करने वाला महापुरुष के समान टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:सह-संपादक की रिपोर्ट गीता सोलहवाँ अध्याय श्लोक – काममाश्रित्य दुष्पूरं दम्भमानमदान्विताः । मोहाद्‌गृहीत्वासद्ग्राहान् प्रवर्तन्तेऽशुचिव्रताः दम्भ, मान और मद से युक्त मनुष्य किसी प्रकार भी पूर्ण न होने वाली कामनाओं का आश्रय लेकर, अज्ञान से मिथ्या सिद्धांतों को ग्रहण करके भ्रष्ट आचरणों को धारण करके …

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(भाग:86) श्रीमद-भगवद गीता उपनिषद् एवं ब्रह्मविद्या तथा योग शास्त्र विषयक श्रीकृष्ण और अर्जुन संवाद

(भाग:86) श्रीमद-भगवद गीता उपनिषद् एवं ब्रह्मविद्या तथा योग शास्त्र विषयक श्रीकृष्ण और अर्जुन संवाद टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:सह-संपादक की रिपोर्ट श्रीमहादेवजी कहते हैं-—पार्वती ! अब गीता के पंद्रहवें अध्याय का माहात्म्य सुनो। गौड़देश में कृपाण-नरसिंह नामक एक राजा थे, जिनकी तलवार की धार से युद्ध में देवता भी परास्त हो जाते थे। उनका बुद्धिमान् सेनापति शस्त्र और शास्त्र की कलाओं का …

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पाप दोष नाशक है कामिका एकादशी व्रत कथा का पाठ

  ✍️टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:सह-संपादक की रिपोर्ट काशी/बनारस 2023 धार्मिक मान्यता के अनुसार कामिका एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति द्वारा जाने अनजाने में किए हुए सारे पाप दोष कट जाते हैं। साथ ही पृथ्वी दान और गौदान समतुल्य फल की प्राप्ति होती है। अतः साधक श्रद्धाभाव से कामिका एकादशी पर श्रीनारायण हरि विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा-उपासना करते हैं। …

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(भाग:85)वाणी,आचरण, कर्म और व्यवहार से किसी को तकलीफ ना देना भी भक्ती के समान है

  टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:सह-संपादक की रिपोर्ट श्रीमद्भगवद्गीता के १५वें अध्याय का नाम पुरुषोत्तमयोग है। इसमें विश्व का अश्वत्थ के रूप में वर्णन किया गया है। यह अश्वत्थ रूपी संसार महान विस्तारवाला है। देश और काल में इसका कोई अंत नहीं है। किंतु इसका जो मूल या केंद्र है, जिसे ऊर्ध्व कहते हैं, वह ब्रह्म ही है एक ओर वह परम …

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(भाग:84) मन वाणी कर्म और शरीर से जो निष्कलंक निष्पाप और बेदाग हो वह पृथ्वी मे साक्षात देवता के समान

  टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:सह-संपादक की रिपोर्ट श्रीमद-भगवद गीता के अनुसार जो मन, वाणी कर्म और शरीर से किसी प्रकार भी किसी को कष्ट न देना सत्यवादी अपना अपकार करने वाले पर भी क्रोधका न होना परमात्मा के लिए सिर भी सौंप दे अन्तःकरणकी उपरति अर्थात् चितकी चंचलताका अभाव निन्दादि न करना प्राणियोंमें दया निर्विकार कोमलता बुरे कर्मों में लज्जा चापलूसी …

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(भाग:83) जिनमें मान बडाई प्रतिष्ठा और माया मोह नष्ट हो गया है वह अविनाशी के परम पद को प्राप्त होते है

  टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:सह-संपादक की रिपोर्ट जिन्होंने आसक्ति रूप दोष को जीत लिया है, जिनकी परमात्मा के स्वरूप में नित्य स्थिति है और जिनकी कामनाएँ पूर्ण रूप से नष्ट हो गई हैं- वे सुख-दुःख नामक द्वन्द्वों से विमुक्त ज्ञानीजन उस अविनाशी परम पद को प्राप्त होते हैं॥ पुरुषोत्तमयोगः (पुरुषोत्तमयोग) गीता पंद्रहवाँ अध्याय श्लोक – श्रीभगवानुवाच ऊर्ध्वमूलमधःशाखम श्वत्थं प्राहुरव्ययम् । छन्दांसि …

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आज रोहिणी नक्षत्र मठ-मंदिरों में मनाया जाएगा श्रीकृष्ण जन्मोत्सव?

आज रोहिणी नक्षत्र मठ-मंदिरों में मनाया जाएगा श्रीकृष्ण जन्मोत्सव? टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:सह-संपादक की रिपोर्ट मथुरा । जन्माष्टमी बुधवार व गुरुवार को मनाई जाएगी। गृहस्थ छह व वैष्णव संप्रदाय के लोग सात सितंबर को भगवान का जन्मोत्सव मनाएंगे। ज्योतिर्विद आचार्य देवेंद्र प्रसाद त्रिपाठी के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद की कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि व रोहिणी नक्षत्र की मध्यरात्रि में …

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भाग:82) सत्वगुण की वृद्धि से उत्तम कर्म करने वालों को निर्मल दिव्य स्वर्गादि लोकों की प्राप्ती

  टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:सह-संपादक की रिपोर्ट इससे पूर्व आपने श्रीमद्भगवद्गीता के चौदहवां अध्याय पढ़ा। १४वें अध्याय का नाम गुणत्रय विभाग योग है। यह विषय समस्त वैदिक, दार्शनिक और पौराणिक तत्वचिंतन का निचोड़ है-सत्व, रज, तम नामक तीन गुण-त्रिको की अनेक व्याख्याएँ हैं। गुणों की साम्यावस्था का नाम प्रधान या प्रकृति है। गुणों के वैषम्य से ही वैकृत सृष्टि का जन्म …

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कधी साजरी होणार कृष्ण जन्माष्टमी? ही बातमी वाचून दूर करा तारखेचा संभ्रम…!कशी करावी पूजा?

भगवान श्रीकृष्णांचा जन्म भाद्रपद महिन्यातील कृष्ण पक्षातील अष्टमी तिथीला झाला. या दिवशी त्यांचा जन्मदिवस जगभरात साजरा केला जातो. भगवान श्रीकृष्ण रोहिणी नक्षत्रात जन्माला आले. त्यामुळे जन्माष्टमी साजरी करताना रोहिणी नक्षत्रही ध्यानात ठेवले जाते. यंदा जन्माष्टमीच्या तारखेबाबत मोठा गोंधळ आहे. कोणी जन्माष्टमीचा सण 6 सप्टेंबर तर कोणी 7 सप्टेंबरला सांगत आहेत. जन्माष्टमीची नेमकी तारीख कोणती आहे ते जाणून घेऊया. कधी साजरी …

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(भाग:81)गीता के अनुसार सर्वव्यापी परमात्मा ना किसी का पाप ग्रहण करते हैं, ना किसी का पुण्य

  टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:सह-संपादक की रिपोर्ट एतज्ज्ञानमिति प्रोक्त मज्ञानं यदतोऽन्यथा ॥ १३-११॥ अध्यात्म ज्ञान में (जिस ज्ञान द्वारा आत्मवस्तु और अनात्मवस्तु जानी जाए, उस ज्ञान का नाम ‘अध्यात्म ज्ञान’ है) नित्य स्थिति और तत्वज्ञान के अर्थरूप परमात्मा को ही देखना- यह सब ज्ञान है और जो इसके विपरीत है वह अज्ञान है- ऐसा कहा है गीता(मूल संस्कृत) गीता (हिंदी भावानुवाद) …

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