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धार्मिक

(भाग:95) श्रीमद-भगवद गीता में छुपा है भव वन्धन से मुक्ति और असाध्य रोगों के उपचार का उपाय

टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:सह-संपादक की रिपोर्ट महाभारत के युद्ध से ठीक पहले श्री कृष्ण द्वारा अर्जुन को दिए गए ज्ञान यानी गीता में ढेरों ज्योतिषीय उपचार भी छिपे हुए हैं । गीता के अध्यायों का नियमित अध्ययन कर हम कई समस्याओं से मुक्ति पा सकते हैं गीता की नैसर्गिक विशेषता यह है कि इसे पढऩे वाले व्यक्ति के अनुसार ही इसकी …

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आज गणपती स्थापनेसाठी कोणते आहेत शुभ मुहूर्त? वाचा

श्रीगणेशाच्या स्थापनेचे आज दोनच मुहूर्त आहेत. मुहूर्तानुसार गणेश स्थापना दुपारी २ वाजेपर्यंतच करता येईल. परंतु काही कारणास्तव या वेळेपर्यंत स्थापना करणे शक्य नसल्यास त्यानंतरच्या कोणत्याही शुभ चौघडिया मुहुर्तात स्थापना करू शकता. मात्र सर्वोत्तम वेळ दुपारची आहे कारण शास्त्रात असेही म्हटले आहे की भगवान गणपतीचा जन्म दुपारीच झाला होता. यावेळी श्रीगणेश स्थापनेला मंगळवारचा योग जुळून येत आहे. या योगात गणपतीच्या विघ्नेश्वर …

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(भाग:94) प्रकृति पृथ्वी परमात्मा और आत्मा अमर अटल अविनाशी है जबकि शरीर नाशवान है

(भाग :94) प्रकृति पृथ्वी परमात्मा और आत्मा अमर अटल अविनाशी है जबकि शरीर नाशवान है टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:संयुुक्त-संपादक की रिपोर्ट हम मननशील होने से मनुष्य कहलाते हैं। मनन हम सत्यासत्य व उचित अनुचित का ही करते हैं। सत्य व उचित बातों का आचरण करना धर्म और असत्य व अनुचित बातों का आचरण अधर्म होता है। धर्म पर चलना मनुष्य का …

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पितरों के आशीर्वाद के लिए लगाए यह 5 पेड़-पौधे? बनी रहेगी मंगल कामनाए!

  टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:सह-संपादक की रिपोर्ट हमारे वैदिक सनातन हिंदू धर्म में पेड़ पौधों का विशेष महत्व है। तुलसी पीपल और केले के पेड़ समेत कई प्रकार के पेड़-पौधों की पूजा की जाती है। पितृपक्ष में कुछ पौधों को लगाने से व्यक्ति को पितरों का आशीर्वाद मिलता है। आईए जानते हैं के घर में किन पेड़-पौधों को लगाने से पितृ …

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(भाग:92) नैतिकता पुण्य और अनैतिकता पाप? निर्णयदाता भी स्वयं हम और हमारे मन वचन कर्म है

टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:सह-संपादक की रिपोर्ट श्रीमद-भगवद गीता के अनुसार पाप और पुण्य मन के भाव हैं। जिस प्रकार देव-कर्म और दानव-कर्म होता है, जिस प्रकार सुख-दुख का अनुभव होता है, उसी प्रकार पाप और पुण्य भी मन के भाव हैं। मोटे रूप से यही मान लिया जाता है कि जो काम खुलेआम किया जाए, वह पुण्य है और जो काम …

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निर्माणाधीन आदि गुरु शंकराचार्य मूर्ति का CM शिवराज के हाथों अनावरण 18 सितंबर को

निर्माणाधीन आदि गुरु शंकराचार्य मूर्ति का CM शिवराज के हाथों अनावरण 18 सितंबर को टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:सह-संपादक की रिपोर्ट भोपाल । मध्यप्रदेश के ओंकारेश्वर में आदि गुरु शंकराचार्य की विशाल प्रतिमा का काम अब अंतिम दौर में है। साल 2018 से इसका निर्माण कार्य शुरू हुआ है। इस मूर्ति का पूरा निर्माण कार्य वासुदेव कामत और भगवान रामपुरे के मार्गदर्शन …

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(भाग:91) प्रकृति-पृथ्वी परमात्म का संतुलन बनाए रखने लिए नैसर्गिक नियमों का परिपालन अनिवार्य है?

भाग:91) प्रकृति-पृथ्वी परमात्म का संतुलन बनाए रखने लिए नैसर्गिक नियमों का परिपालन अनिवार्य है? टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:सह-संपादक की रिपोर्ट वैदिक सनातन हिन्दू धर्म के अनुसार मानव शरीर अलग वस्तु है, और आत्मा अलग वस्तु। “शरीर जड़ है, और आत्मा चेतन है। शरीर का भोजन अलग है, आत्मा का भोजन अलग है।” दाल-रोटी सब्जी खीर पूरी हलवा मिठाई आदि यह शरीर …

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(भाग : 90) नैसर्गिक नियमानुसार असत्य का पराभव और विजयी सदा सत्य ईमान धर्म की ही होती है

  ✍️टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:सह-संपादक की रिपोर्ट महाभारत में जुए की शर्त के अनुसार युधिष्ठिर को अपने भाइयों के साथ बारह वर्ष का वनवास तथा एक वर्ष का अज्ञातवास बिताना था। युधिष्ठिर ने माता कुंती को विदुर के घर पहुँचा दिया तथा सुभद्रा अपने पुत्र अभिमन्यु और द्रौपदी के पाँचों पुत्रों को लेकर अपने मायके चली गई। पांडव द्रौपदी तथा अपने …

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(भाग:89) श्रीमद-भगवद गीता के अनुसार मनुष्य त्याग के द्धारा परमात्मा को प्राप्त कर सकता है।

(भाग:89) श्रीमद-भगवद गीता के अनुसार मनुष्य त्याग के द्धारा परमात्मा को प्राप्त कर सकता है। टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:सह-संपादक की रिपोर्ट श्रीभगवानुवाच काम्यानां कर्मणां न्यासं संन्यासं कवयो विदुः । सर्वकर्मफलत्यागं प्राहुस्त्यागं विचक्षणाः ॥ १८-२॥ श्री भगवान कहते हैं – कुछ कवि (विद्वान) तो काम्य कर्मों के त्याग को संन्यास समझते हैं पर दूसरे विचारक सभी कर्मों के फल-त्याग को त्याग कहते …

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(भाग:88) अधर्म का नाश और धर्म की विजय के लिए संघर्षरत पुरुष धरती मे साक्षात देवताओं के समान है

  ✍️टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:सह-संपादक की रिपोर्ट श्री भगवान्‌ बोले- मनुष्यों की वह शास्त्रीय संस्कारों से रहित केवल स्वभाव से उत्पन्न श्रद्धा (अनन्त जन्मों में किए हुए कर्मों के सञ्चित संस्कार से उत्पन्न हुई श्रद्धा ”स्वभावजा” श्रद्धा कही जाती है।) सात्त्विकी और राजसी तथा तामसी- ऐसे तीनों प्रकार की ही होती है। गीता सत्रहवाँ अध्याय श्लोक – अशास्त्रविहितं घोरं तप्यन्ते ये …

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