(भाग:345) नि:स्वार्थ सेवा कर्म भाव ही कामयाबी और प्रगति का मूल मंत्र टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट नि:स्वार्थ भाव से सेवा कर्म का भाव रखना ही जीवन में कामयाबी और प्रगति का मूलमंत्र है। निस्वार्थ भाव रखते हुए समाज हित में लगातार कार्य करना ही मानव जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है। -सेवा करने से हमेशा अच्छे संस्कार हमें मिलते …
Read More »(भाग:344) निसर्ग परमात्मा मनुष्यों को अच्छे गुण धर्म, कर्म और स्वभाव में प्रवृत करता है।
(भाग:344) निसर्ग परमात्मा मनुष्यों को अच्छे गुण धर्म, कर्म और स्वभाव में प्रवृत करता है। टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट एक बार एक आचार्य अपने शिष्यों की कक्षा ले रहे थे। उन्होंने गुरु द्रोणाचार्य का उदहारण दिया। गुरु द्रोणाचार्य ने एक बार युधिष्ठिर और दुर्योधन की परीक्षा लेने का निश्चय किया। द्रोणाचार्य ने युधिष्ठिर से कहा की जाओ और कहीं …
Read More »(भाग:343)नैसर्गिक परमात्मा संसार संचलन के लिए निशुल्क और निःस्वार्थ सेवा प्रदान कर रहा है
(भाग:343)नैसर्गिक परमात्मा संसार संचलन के लिए निशुल्क और निःस्वार्थ सेवा प्रदान कर रहा है टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट नैसर्गिक प्राकृतिक परमात्मा संसार को निशुल्क और निःस्वार्थ सेवा प्रदान करते आ रहा है।जैसे बहुमूल्य आकाश गंगाजल,प्राणवायू, ऊर्जा, सीतलता के द्धारा जगत का निर्माण निर्देशन और प्रबंधन कर रहा है।विनाश और सृजन भी कर रहा है।निसर्ग परमात्मा जिसका वह …
Read More »(भाग:342)वेदमाता गायत्री की भक्ति से मिलता है आयुर्वल प्राणशक्ति कीर्ती और ब्रम्हतेज
(भाग:342)वेदमाता गायत्री की भक्ति से मिलता है आयुर्वल प्राणशक्ति कीर्ती और ब्रम्हतेज टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट अथर्ववेद १९- ७१ में गायत्री की स्तुति की गयी है, जिसमें उसे आयु, प्राण, शक्ति, कीर्ति, धन और ब्रह्मतेज प्रदान करने वाली कहा गया है। विश्वामित्र का कथन है—’गायत्री के समान चारों वेदों में मन्त्र नहीं है। सम्पूर्ण वेद, यज्ञ, दान, तप गायत्री …
Read More »(भाग:341) चंचल मन मतंग माने नहीं? जब लग धोखा ना खाए
(भाग:341) चंचल मन मतंग माने नहीं? जब लग धोखा ना खाए टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट चंचल मन मतंग माने नहीं जब लग धोखा न खाए। जैसे बिधवा स्त्री गर्भ रहे पश्ताय।। इसलिए चंचल मन को दुनियादारी से खींचकर उसे एक प्रकार से स्थिर करके रखना होगा। बार-बार ऐसा करना होगा। इच्छाशक्ति द्वारा मन को संयम कर, उसे …
Read More »(भाग: 340) ब्रह्मभोज कराने के नैसर्गिक लाभ
(भाग: 340) ब्रह्मभोज कराने के नैसर्गिक लाभ टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट वैदिक सनातन धर्म शास्त्र के अनुसार जन सामान्य ब्रह्म भोजन करवाने के नियम और नैसर्गिक लाभ के संबंध पर प्रकाश डाल रहे हैं! ब्राह्मण के लिए भोजन को पवित्रता और शुद्धता से बनाना चाहिए और उसमें भूलकर भी लहसुन, प्याज आदि का प्रयोग नहीं करना चाहिए. धार्मिक मान्यता …
Read More »(भाग:339) साधू संत-मुनि महात्माओं को भोजन प्रसाद करवाने के नियम
(भाग:339) साधू संत-मुनि महात्माओं को भोजन प्रसाद करवाने के नियम टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट चातुर्मासीय संतों के आहार नियम इतने सख्त कि आधे समय उपवास पर ही रहते हैं चातुर्मासीय संतों के आहार नियम इतने सख्त कि आधे समय उपवास पर ही रहते हैं समग्र जैन समाज इन दिनों चातुर्मास में व्यस्त है। शहर में 8 दिगंबर संत …
Read More »(भाग:339) ब्राह्मण भोजन ब्रह्मभोज कराने के नैसर्गिक-आध्यात्मिक नियम
(भाग:339) ब्राह्मण भोजन ब्रह्मभोज कराने के नैसर्गिक -आध्यात्मिक नियम टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट वैदिक सनातन धर्म शास्त्र के अनुसार जन सामान्य ब्रह्म भोजन करवाने के नियमों पर प्रकाश डाल रहे हैं! ब्राह्मण के लिए भोजन को पवित्रता और शुद्धता से बनाना चाहिए और उसमें भूलकर भी लहसुन, प्याज आदि का प्रयोग नहीं करना चाहिए. धार्मिक मान्यता के अनुसार दक्षिण …
Read More »(भाग:338) भोजन प्रसाद ग्रहण करने का सही नैसर्गिक नियम
(भाग:338) भोजन प्रसाद ग्रहण करने का सही नैसर्गिक नियम टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट हिंदू मान्यता के अनुसार, भोजन हमेशा जमीन पर किसी आसन पर बैठकर ही करना चाहिए. खाना उतना ही लेना चाहिए जितना आप खा सकें. कभी भी थाली में अन्न नहीं छोड़ना चाहिए. कभी भी न तो बिस्तर पर बैठकर भोजन खाना चाहिए और न ही खाने …
Read More »(भाग:337)भोजन ग्रहण करने के पूर्व एवं पश्चात स्मरण करना चाहिए निम्नमंत्र
(भाग:337)भोजन ग्रहण करने के पूर्व एवं पश्चात स्मरण करना चाहिए निम्नमंत्र टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट भारतीय वैदिक सनातन धर्म परंपरा के अनुसार भोजन करने से पहले और बाद के कुछ नियमों के बारे में बताया गया है. प्राचीन काल में लोग भोजन करने से पहले और बाद इन नियमों का पालन किया करते थे. आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी …
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