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(भाग:227)मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की सुग्रीव सै मित्रता और बाली वध का मंचन देख दर्शक हुए भाव विभोर

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(भाग:227)मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की सुग्रीव सै मित्रता और बाली वध का मंचन देख दर्शक हुए भाव विभोर

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टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट

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श्री रामलीला कमेटी द्वारा रामलीला का आयोजन किया जा रहा है। रामलीला मंचन के दौरान शनिवार रात्रि सुग्रीव मित्रता बाली वध का मंचन किया गया। रामलीला के कलाकारों ने बढ़े ही सजग तरीके से दोनों लीलाओं का मंचन किया गया। सुग्रीव मित्रता बाली वध का मंचन देख श्रद्धालु भाव विभोर हो गए।

 

रामलीला कमेटी कोषाध्यक्ष विनोद मित्तल ने बताया कि रामलीला मंचन में सोने के मृग मिलने पर भगवान राम और लक्ष्मण वापस पंचवटी पहुंचते हैं,जहां रावण के सीता हरण के बाद भगवान राम व्याकुल होकर सीता की खोज करते हुए सबरी की कुटिया पहुंच जाते हैं। सबरी उनको अपने जूठे बेर खिलाती है। आगे जाने पर उनकी हनुमान और सुग्रीव से मित्रता हों जाती है। सुग्रीव भगवान राम को अपने भाई के द्वारा किए गए अत्याचारों से अवगत कराता है। भगवान राम के कहने पर सुग्रीव अपने बड़े भाई बाली को युद्ध करने के लिए ललकारता है। प्रथम बार में सुग्रीव बाली से मार खा कर चला आता है। इससे भगवान राम सुग्रीव को दोबारा युद्ध करने के लिए भेजते हैं। दूसरी बार पेड़ की आड़ में छिपकर वध कर देते हैं। श्रद्धालुओं ने भगवान श्री राम के जयकारे लगाने शुरू कर दिए। इस अवसर पर रामलीला कमेटी प्रधान प्रेम जग्गी के साथ सभी पदाधिकारी इलाका निवासी उपस्थित रहे।

 

बजाजा बाजार में मंचन करते कलाकार।

 

हनुमान ने की सीता माता की खोज

 

शहजादपुर| शहजादपुर में चल रही रामलीला में कलाकारों ने सुग्रीव से राम मिलन बाली वध का मंचन किया गया। जब श्रीराम सीता माता को खोजते हुए हनुमान से मिले तो हनुमान श्रीराम को मिलन को देखकर दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए। भगत से भगवान का मिलन इस सुंदर दृश्य को देखकर भावविभोर भी हुए। बाली सुग्रीव के युद्ध का प्रसंग किया गया जिसे दर्शकों ने खूब सराहा और बाली का वध श्रीराम द्वारा किया गया। बाली सुग्रीव के दोनों के युद्ध की बाली श्रीराम के संवाद की लोगों ने प्रशंसा की। रामलीला देखने के लिए दूरदराज से दर्शक आते हैं।

 

शहजादपुर में हनुमान ने किया लंका दहन

 

शहजादपुर: श्री सनातन धर्म महावीर दल द्वारा आयोजित श्री रामलीला मंचन के सातवें दिन लंका दहन प्रसंग का मंचन किया गया कार्यक्रम की शुरूआत राजीव मेहता ने हनुमान जी की आरती उतारकर की। उन्होंने कहा कि श्री राम के जीवन चरित्र से हमें शिक्षा लेकर उसे अपने जीवन में उतारना चाहिए। तभी रामायण को पढऩे देखने का फायदा है। इस दौरान श्यामलाल कौशिक, वेद प्रकाश, भगवत प्रसाद, रामेश्वर शर्मा, ओमप्रकाश, कुलभूषण सूरी, सोमनाथ, सुरजीत धीमान, मुकेश कुमार जसपाल भट्टी, राजेश वर्मा, चंदेश चोपड़ा, बबला वर्मा, देवेंद्र सिंह, जगतार सिंह और अशोक शर्मा मौजूद थे।

 

सुग्रीव-बाली युद्ध का मंचन

 

अम्बालासिटी | शंकर ड्रामेटिक क्लब की ओर से पुरानी अनाज मंडी में रामलीला आयोजित की जा रही है। शुक्रवार रात को सुग्रीव-बाली युद्ध भगवान राम द्वारा बाली वध दिखाया गया। इस दौरान सभी नाटकीय रूपांतरणों का दर्शकों ने तालियां बजा काम की सराहना की। क्लब के सदस्यों ने बताया कि राम का किरदार राकेश, लक्ष्मण का किरदार पवन, सुग्रीव का किरदार कलजुग बाली का किरदार लेखा निभा रहे हैं। क्लब के सदस्यों ने बताया कि शनिवार को सुग्रीव का राज तिलक लंका पर कूच की तैयारी की योजना दिखाई गई कि रामलीला मंचन में सोने के मृग मिलने पर भगवान राम और लक्ष्मण वापस पंचवटी पहुंचते हैं,जहां रावण के सीता हरण के बाद भगवान राम व्याकुल होकर सीता की खोज करते हुए सबरी की कुटिया पहुंच जाते हैं। सबरी उनको अपने जूठे बेर खिलाती है। आगे जाने पर उनकी हनुमान और सुग्रीव से मित्रता हों जाती है। सुग्रीव भगवान राम को अपने भाई के द्वारा किए गए अत्याचारों से अवगत कराता है। भगवान राम के कहने पर सुग्रीव अपने बड़े भाई बाली को युद्ध करने के लिए ललकारता है। प्रथम बार में सुग्रीव बाली से मार खा कर चला आता है। इससे भगवान राम सुग्रीव को दोबारा युद्ध करने के लिए भेजते हैं। दूसरी बार पेड़ की आड़ में छिपकर वध कर देते हैं। श्रद्धालुओं ने भगवान श्री राम के जयकारे लगाने शुरू कर दिए। इस अवसर पर रामलीला कमेटी प्रधान प्रेम जग्गी के साथ सभी पदाधिकारी इलाका निवासी उपस्थित रहे।

 

बजाजा बाजार में मंचन करते कलाकार।

शहजादपुर में चल रही रामलीला में कलाकारों ने सुग्रीव से राम मिलन बाली वध का मंचन किया गया। जब श्रीराम सीता माता को खोजते हुए हनुमान से मिले तो हनुमान श्रीराम को मिलन को देखकर दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए। भगत से भगवान का मिलन इस सुंदर दृश्य को देखकर भावविभोर भी हुए। बाली सुग्रीव के युद्ध का प्रसंग किया गया जिसे दर्शकों ने खूब सराहा और बाली का वध श्रीराम द्वारा किया गया। बाली सुग्रीव के दोनों के युद्ध की बाली श्रीराम के संवाद की लोगों ने प्रशंसा की। रामलीला देखने के लिए दूरदराज से दर्शक आते हैं।

 

शहजादपुर में हनुमान ने किया लंका दहन

 

शहजादपुर: श्री सनातन धर्म महावीर दल द्वारा आयोजित श्री रामलीला मंचन के सातवें दिन लंका दहन प्रसंग का मंचन किया गया कार्यक्रम की शुरूआत राजीव मेहता ने हनुमान जी की आरती उतारकर की। उन्होंने कहा कि श्री राम के जीवन चरित्र से हमें शिक्षा लेकर उसे अपने जीवन में उतारना चाहिए। तभी रामायण को पढऩे देखने का फायदा है। इस दौरान श्यामलाल कौशिक, वेद प्रकाश, भगवत प्रसाद, रामेश्वर शर्मा, ओमप्रकाश, कुलभूषण सूरी, सोमनाथ, सुरजीत धीमान, मुकेश कुमार जसपाल भट्टी, राजेश वर्मा, चंदेश चोपड़ा, बबला वर्मा, देवेंद्र सिंह, जगतार सिंह और अशोक शर्मा मौजूद थे।

 

सुग्रीव-बाली युद्ध का मंचन

 

अम्बालासिटी | शंकर ड्रामेटिक क्लब की ओर से पुरानी अनाज मंडी में रामलीला आयोजित की जा रही है। शुक्रवार रात को सुग्रीव-बाली युद्ध भगवान राम द्वारा बाली वध दिखाया गया। इस दौरान सभी नाटकीय रूपांतरणों का दर्शकों ने तालियां बजा काम की सराहना की। क्लब के सदस्यों ने बताया कि राम का किरदार राकेश, लक्ष्मण का किरदार पवन, सुग्रीव का किरदार कलजुग बाली का किरदार लेखा निभा रहे हैं। क्लब के सदस्यों ने बताया कि शनिवार को सुग्रीव का राज तिलक लंका पर कूच की तैयारी की योजना दिखाई गई

 

जानिए, क्या था बाली और सुग्रीव के युद्ध का कारण

 

वानर राज बाली को तपस्या भंग करने की वजह से मतङ्ग ऋषि का श्राप मिला था कि अगर वह ऋष्यमूक पर्वत के समीप या पर्वत क्षेत्र में प्रवेश करेगा तो उसकी मृत्यु हो जाएगी। इसके लिए बाली ऋष्यमूक पर्वत पर नहीं जाता था।

जानिए, क्या था बाली और सुग्रीव के युद्ध का कारण

रामायण में वानर राज बाली और सुग्रीव की कथा का वर्णन विस्तार से बताया गया है। साथ ही तुलसीदास द्वारा रचित रामचरित मानस में वानर बंधुओं का उल्लेख है। सनातन धार्मिक ग्रंथ रामायण में निहित है कि वानर राजा सुग्रीव ने वनवास के दौरान सीताहरण के बाद लंका नरेश रावण संग युद्ध में मर्यादा पुरषोत्तम भगवान श्रीराम की सहायता की थी। इस युद्ध में वानर सेना की मदद से भगवान श्रीराम ने रावण और उनकी सेना को परास्त किया था। जब सीता हरण के बाद भगवान श्रीराम और लक्ष्मण वन में माता सीता की तलाश कर रहे थे। उस वक्त उनकी मुलाकात परम भक्त हनुमान और वानर राजा सुग्रीव से हुई थी। सुग्रीव भी अपने भाई बाली के डर से छुपे रहते थे।

वानर राज बाली को तपस्या भंग करने की वजह से मतङ्ग ऋषि का श्राप मिला था कि अगर वह ऋष्यमूक पर्वत के समीप या पर्वत क्षेत्र में प्रवेश करेगा, तो उसकी मृत्यु हो जाएगी। इसके लिए बाली ऋष्यमूक पर्वत पर नहीं जाता था। यह जान सुग्रीव पर्वत जा छिपा था। भगवान राम से मिलने पर वानर राजा सुग्रीव ने अपनी आपबीती सुनाई। यह सुन भगवान ने सहायता करने और बाली का वध करने का वादा किया। आइए, बाली और सुग्रीव के युद्ध के कारण की कथा जानते हैं-

 

युद्ध की कथा

 

किदवंती है कि एक बार की बात है जब दुंदभी नामक दैत्य ने वानर राजा बाली को युद्ध के लिए ललकारा था। वानर राजा बाली किसी भी ललकार को ठुकराता नहीं था और युद्ध मैदान पर चला आता था। बाली के पराक्रम के आगे दुंदभी टिक नहीं सका और महज कुछ पल में बाली ने दुंदभी को परास्त कर उसका वध कर दिया। इसके बाद दुंदभी के शव को हवा में घुमाकर फेंक दिया। इससे दुंदभी का शव कई टुकड़ों में बंट गया।

 

इस दौरान दुंदभी के शरीर से रक्त प्रवाहित होकर मतङ्ग ऋषि के आश्रम पर जा गिरती है। इससे क्रोधित होकर मतङ्ग ऋषि को श्राप दे देता है कि वह आश्रम के पास आएगा, तो उसकी मौत हो जाएगी। कालांतर में दुंदभी का भाई मायावी वानर राज बाली को युद्ध के लिए ललकारता है। वानर राज बाली पुन: युद्ध के लिए आता है। बाली कई बार मायावी को समझाता है कि वह लौट जाए। युद्ध करेगा, तो उसकी मौत निश्चित है। हालांकि, मायावी नहीं मानता है। तब बाली मायावी का पीछा करने लगता है।

 

मायावी एक गुफा में जाकर छिप जाता है। यह देख बाली अपने भाई सुग्रीव को गुफा के बाहर इंतजार करने के लिए कहता है। यह कहकर बाली गुफा के अदंर जाकर मायावी से लड़ने लगता है। कुछ समय बाद गुफा से तेज आवाज आती है। इसके बाद रक्त की धारा गुफा से बाहर आती है। यह देख सुग्रीव को लगता है कि मायावी ने बाली का वध कर दिया है। यह सोच गुफा को पत्थर से बंदकर सुग्रीव किष्किधां लौट आता है।

प्रजा में यह सूचना फैल जाती है कि वानर बाली को युद्ध में वीरगति प्राप्त हुई है। यह जान सुग्रीव को नया राजा बनाया जाता है। कुछ दिनों बाद बाली पुन: लौटकर अपने राज आता है। यह देख सब हैरान हो जाते हैं। क्रोधित बाली अपने भाई के कार्य से अप्रसन्न हो जाता है और तत्काल राज छोड़ने का आदेश देता है। हालांकि, सुग्रीव की पत्नी को जाने नहीं देता है और अपने साथ रख लेता है। इस वजह से वानर बंधुओं के बीच युद्ध हुआ

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