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अनिष्ट सूतक-पातक ग्रह व्याधि और मांगलिक दोष से वैवाहिक क्लेश निदान 

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अनिष्ट सूतक-पातक ग्रह व्याधि और मांगलिक दोष से वैवाहिक क्लेश निदान

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टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट

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भारतीय ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार पूर्व जन्म के कर्मों,विवाह पूर्व अनैतिक शारीरिक संबंध और जन्म लग्न कु्ण्ली फलादेश के अनुसार जिस राशि नक्षत्र मे शनि,राहू,मांगलिक दोष, शुक्र दोष और अनिष्ट महापाप ग्रह नजर व्याधि दोष-क्लेश होने के कारण विवाह में देरी का कारण बनता हैं। मांंगलिक दोषपूर्ण के कारण काल सर्प दोष और शनि ग्रह को कठिनाई और दुख का कारक माना जाता है और इसकी साढ़े साती य अढैया शनि और बुरी नजर दोष भी विवाह में विलंब का कारण बनता है। शुक्र ग्रह धन, सुख और प्रेम का कारक माना जाता है। लेकिन अगर यह ग्रह अनिष्ठ और अशुभ स्थिति में होता है, तो लडकियों की शादी में काफी देरी होती या आजीवन अविवाहित रह सकती है।

 

बुुरी नजर दोष के कारण नींद सपने मे निरंतर सैक्स काम वासनाओं की सोच तथा भयंकर सैक्सी सहवास के वीडियो दृश्य देखते और सोचते रहने से मानसिक दोष उत्पन्न होता है।इसी वजह से भी लडकियों के चेहरे की आकर्षक शक्तियां क्षीण हो जाती हैं। नतीजा मांगलिक दोष और मानसिक व्याधियां उत्पन्न होती है।अनिष्ठ सूतक पातक महापाप ग्रह व्याधियों के कारण यौन जठारागनि का खतरा है। इसके अलावा जातक का मुखमंडल और आंखों का आकर्षण गायब होना,काल सर्प दोष और मांगलिक दोष का कारण बनता है। नतीजा बनते वैवाहिक संबंध बनने की वजाय या विवाह के बाद भी रिस्ता टूटने छोडछुट्टी का डर बनता है?

 

इसके अलावा जो लडकियां किसी आर्टिफिशल सुंदर अभिनेताओं के बारे में मन ही मन लव सैक्स वासनाओं का आवेश और सैक्स दुर्भावनाओं की वजह से कुंठित अनिष्ठ सूतक व्याधि ग्रसित अभिनेता य सुंदर गैर युवक का चेहरा मन-मस्तिष्क और दिलों दिमाग मे घर कर लेता है। इसे कार्मिक और मानसिक मागलिक दोषपूर्ण कहते है। इसलिए किसी अन्य कथित सुंदर युवक य अभिनेता की सोच को मन और दिल से निकालकर भगवान का ध्यान करना चाहिए?

 

अज्ञानवस बिना सूझ-बूझ मन में गलत सैक्सी भावना की सोच के दुष्प्रपरिणामों की वजह से बहुतसी अविवाहित लडकियां कुंवारी रह जाती और अपने भविष्य की चिंता में इधर-उधर भटकती या ऊटपटांग कदम उठा लेती हैं। इसलिए समय रहते इस गंभीर समस्या से छुटकारा पाने के लिए किसी कुशल मनोविज्ञान और आयुर्विज्ञान विशेषज्ञ की राय लेकर मानसिक और शारीरिक शुद्धीकरण ( पवित्रीकरण) से निराकरण जरुरी है।

 

ज्ञात हुआ कि दुनिया भर मे अधिकांश अय्याशी और चरित्र हीन अभिनेताओं अभिनेत्रियों और बिगड़ैल नव युवकों में कैंंसर और नपुंसकता नामक प्राण घातक बीमारियों से समय से पहले मृत्यू हो जाती है?

 

*अनिष्ट ग्रह व्याधि और मांगलिक दोष 3 प्रकार के होते हैं*

 

1) अधिदैविक:- यह नैसर्गिक नियमों के खिलाफ चरित्र आचरण और कार्यप्रणाली के कारण उपजता है

 

2) अधिभौतिक : -अनैतिक संबंध से अभिषापित दोष पारिवारिक लोक लाज मर्यादाओं का उलंघन की कलह झूठ छल कपट विश्वासघात और सामाजिक रीति-रिवाज से घ्रणा और नफरत से अनिष्ठ सूतक पातक महापाप ग्रह व्याधि दोष कृत्रिम मांगलिक दोष का प्रकोप कहते है।

 

3)अधि आध्यात्मिक : -वैदिक सनातन धर्म के खिलाफ मानसिकता और नैसर्गिक नियम संयम के उलंघन की वजह से शरीर के अंदर जठरागिनी और अभिशाप की ज्वाला घर करती है।

भारतीय ववैदिक सनातन धर्म के आयुर्विज्ञान और ज्योतिष शास्त्र के अनुसार आप जानेंगे कि सूतक क्या होता है? सूतक कितने दिन का होता है? सूतक में वर्जित कार्य क्या-क्या है? व सूतक कितनी पीढ़ी तक लगता है?

हिन्दू धर्म में किसी के भी मरण तथा जन्म पर सूतक तथा पातक लग जाता है। अगर घर के किसी सदस्य की मृत्यु हो जाती है तो पातक लगता है तथा किसी बच्चे के जन्म पर सूतक लगता है। जन्म के समय सूतक इसीलिए लगता है क्योकि जन्म के समय कुछ अशुद्धियाँ होती है जैसे नाल काटी जाती है आदि, जिसके फलस्वरूप सूतक लगता है तथा मृत्यु के समय दाह संस्कार से हुई हिंसा के फलस्वरूप पातक लगता है। सूतक या पातक जन्म के समय, ग्रहण के समय, स्त्री के मासिक धर्म के समय किसी की मृत्यु के समय पर लगते हैं।

 

समाज के जिन किशोरी युवक -युवतियों मे असमय और गलत नक्षत्रों में अनैतिक संबंध की वजह से गर्भाशय में कुचल कुचलकर जीवित सु्क्राणुओं की मृत्यू हो जाती है।परिणामत: उसे “अनिष्ठ सूतक पातक महापाप ग्रह व्याधि दोष” कहते हैं। इस प्रकार के सूतक पातक महापाप ग्रह व्याधि दोष 40 वर्ष तक रहता है।

 

बच्चे के जन्म के समय घर वालो को और माँ को सूतक लग जाता है, सूतक की अवधि कुछ इस प्रकार है, ब्राह्मणों में 10 दिन, वैश्य के लिए 20 दिन और क्षत्रिय के लिए 15 दिन और शूद्र के लिए 30 दिन का सूतक होता हैं।

 

सूतक में वर्जित कार्य

 

किसी भी धार्मिक स्थल पर जाना तथा धार्मिक कार्यक्रमों में सम्मिलित होना वर्जित होता हैं। और

पूजा पाठ भी नही कर सकते हैं।

तूलसी के पौधे को छूने की मनाही होती है।

मंदिर की सामग्री को छूने की मनाही है।

भगवान की मूर्ति को नही छूना चाहिए।

 

सूतक और पातक में अंतर

 

किसी के जन्म पर सूतक-पातक तथा किसी की मृत्यु पर लगता हैं। गर्भाशय मे जीवित शुक्राणू कुचलकर मर जाने से भी खतरनाक सूतक- पातक “अनिष्ठ महापाप व्याधि दोष” कहते हैं। समस्त चिंताओं का त्याग करके विशेषज्ञ द्धारा सबा 5 लाख महामृत्युंजय और 10 महाविधा का पाठ करवाने से सभी प्रकार की अनिष्ट महापाप ग्रह नजर दोष और मांगलिक दोष का निराकरण करना चाहिए।

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