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(भाग:264)अश्वमेध घोडा के लिए श्रीराम दल व लव-कुश के बीच युद्ध में हनुमान भरत शत्रुघ्न लक्षमण हारे

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भाग:264)अश्वमेध घोडा के लिए श्रीराम दल व लव-कुश के बीच युद्ध में हनुमान भरत शत्रुघ्न लक्षमण हारे

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टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट

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अश्वमेध यज्ञ में यज्ञ करवाने वाले राजा द्वारा सेना के साथ अश्व को दूर दूर के राज्यों तक भेजा जाता है। जो अपने राज्य से अश्व को चले जाने देता है, वह उस राजा की दासता स्वीकार कर लेता है। अर्थात उस अश्व के स्वामी राजा के नियम अब उसके राज्य में लागू होंगे। जो अश्व को बांध लेता है, वह युद्ध करता है। अश्वमेध यज्ञ का घोड़ा पकड़ने वाले राजा को युद्ध क्यों करना पड़ता है?

यदि किसी भूमि का अधिपति या राजा यज्ञकर्ता राजा की अधीनता स्वीकार नहीं करता था तो वह अश्‍व को बंदी बना लेता था। तब उस राजा के साथ अश्‍वमेध करने वाले राजा की सेना का युद्ध होता था।

 

लव और कुश में ऐसी कौन सी महाशक्तियां थीं, जो उन्होंने लक्ष्मण, भरत, सुग्रीव, हनुमान आदि को परास्त कर दिया था?यह सब माता सीता के अपमान का बदला लव-कुश ने लिया है। लव और कुश के पुत्रों का नाम क्या था? लव और कुश में ऐसी कौन सी महाशक्तियां थीं, जो उन्होंने लक्ष्मण, भरत, सुग्रीव, हनुमान आदि को परास्त कर दिया?

मैने दो रामायण पढ़ी हैं रामचरित मानस और दूसरी राधेश्याम रामायण तो इसका उत्तर रामचरितमानस में तो नहीं है राधेश्याम रामायण में जरूर है उसी के अनुसार ये जवाब दे रही हू उस से पहले ये बता दू कि भगवान विष्णु की एक बड़ी खासियत ये है कि वो अपने भक्त को अभिमान से ग्रस्त नही होने देते यही बात उन्होंने अपने रामावतार और कृष्णावतार भी सिद्ध किया है तो अब प्रश्न पर आते हे जब भगवान राम ने देखा कि कहीं ना कही लक्ष्मण भरत और शत्रुघ्न और वानर दल किसी न किसी अभिमान से ग्रस्त हो रहा है तब इनका अभिमान छुड़ाने के लिए भगवान ने लव कुश लीला रची तो यही कारण है कि ये सभी ,भरत शत्रुघ्न, लक्ष्मण और सुग्रीव हनुमान जी आदि सभी लव और कुश से पराजित हो गए🙏

रामायण का प्रसारण लोगों के बीच चर्चा का केंद्र बना हुआ है. 80 के दशक में पहली बार प्रसारित हुई रामायण से भारतीय जनमानस की कई यादें जुड़ी हुई हैं. यही वजह है कि जैसे-जैसे अभी रामायण की कहानी आगे बढ़ रही है सोशल मीडिया पर इससे संबंधित पोस्ट खूब देखने को मिल रहे हैं. लोग रामायण की कहानी पर प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं. अब रामायण की कहानी लव-कुश के दिलचस्प प्रकरण पर पहुंच गई है. भगवान राम ने अश्वमेध यज्ञ किया था. इस यज्ञ में राम ने विजय के प्रतीक के रूप में घोड़ा छोड़ा था जिसे उनके पुत्रों लव और कुश ने पकड़ लिया था.

लव के जन्म की कहानी

लंका से लौटने के बाद एक धोबी की शिकायत पर राम ने सीता के त्याग का फैसला लिया था. इसके बाद सीता को लक्ष्मण वन में छोड़ने गए थे. लक्ष्मण के वन में छोड़ने के बाद सीता आत्महत्या के इरादे से एक पेड़ की ओर बढ़ती हैं. ठीक इसी समय वहां से गुजर रहे महर्षि वाल्मीकि ने उन्हें रोक लिया. इसके बाद वाल्मीकि सीता को अपने आश्रम में ले आते हैं. यहीं पर सीता ने लव को जन्म दिया था.

एक दिन लव को कुटिया में सुलाकर सीता किसी काम से बाहर जाती हैं तो वाल्मीकि से लव का खयाल करने का आग्रह करती हैं. कुछ देर बाद लव भी कुटिया से बाहर निकल जाते हैं. ऐसे में लव को कुटिया में न पाकर वाल्मीकि चिंतित हो जाते हैं. वो इस बात को सोच कर चिंतित हो जाते हैं कि अगर सीता वापस लौटेंगी और लव को कुटिया में नहीं पाएंगी तो क्या होगा. सीता को इस मुश्किल से बचाने के लिए महर्षि वाल्मीकि ने एक कुशा को मंत्रशक्ति के जरिए कुश बना दिया. जब सीता वापस लौटीं तो उनके साथ लव भी था जो उन्हें बाहर ही मिल गया था. बाद महर्षि ने सीता को सारी बात बताई.

 

महर्षि वाल्मीकि थे गुरु

महर्षि वाल्मीकि लव-कुश को शस्त्र विद्या का गहन प्रशिक्षण देते हैं. उधर, अयोध्या में भगवान राम अश्वमेध यज्ञ का घोड़ा रवाना करते हैं. महर्षि वाल्मीकि के आश्रम के पास यज्ञ का घोड़ा पहुंचता है तो लव-कुश शत्रुघ्न को परास्त कर अश्वमेध का घोड़ा रोक देते हैं. दोनों वीर बालकों का लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न से युद्ध होता है. तीनों भाई युद्ध में पराजित हो जाते हैं. तब युद्ध के लिए भगवान राम पहुंचते हैं. लव-कुश बाण तानने लगते हैं..लेकिन महर्षि वाल्मिीकि उन्हें रोक देते हैं.

वाल्मीकि दोनों को बताते हैं कि ये तुम्हारे पिता हैं. इसके बाद लव-कुश और राम के बीच संवाद होता है. राम आग्रह करते हैं कि सीता वापस अयोध्या चलें लेकिन सीता इसके लिए तैयार नहीं होती हैं. सीता कहती हैं कि आपने मुझ निर्दोष को त्यागकर मेरे आत्म सम्मान को ठेस पहुंचाई है. अंत में सीता धरती में समाहित हो जाती हैं

लव और कुश में ऐसी कौन सी महाशक्तियां थीं, जो उन्होंने लक्ष्मण, भरत, सुग्रीव, हनुमान आदि को परास्त कर दिया?

लव और कुश के पुत्रों का नाम क्या था?

लव और कुश में ऐसी कौन सी महाशक्तियां थीं, जो उन्होंने लक्ष्मण, भरत, सुग्रीव, हनुमान आदि को परास्त कर दिया?

मैने दो रामायण पढ़ी हैं रामचरित मानस और दूसरी राधेश्याम रामायण तो इसका उत्तर रामचरितमानस में तो नहीं है राधेश्याम रामायण में जरूर है उसी के अनुसार ये जवाब दे रही हू उस से पहले ये बता दू कि भगवान विष्णु की एक बड़ी खासियत ये है कि वो अपने भक्त को अभिमान से ग्रस्त नही होने देते यही बात उन्होंने अपने रामावतार और कृष्णावतार भी सिद्ध किया है तो अब प्रश्न पर आते हे जब भगवान राम ने देखा कि कहीं ना कही लक्ष्मण भरत और शत्रुघ्न और वानर दल किसी न किसी अभिमान से ग्रस्त हो रहा है तब इनका अभिमान छुड़ाने के लिए भगवान ने लव कुश लीला रची तो यही कारण है कि ये सभी ,भरत शत्रुघ्न, लक्ष्मण और सुग्रीव हनुमान जी आदि सभी लव और कुश से पराजित हो गए🙏

रामायण में लव-कुश कांड क्या है?

बाल्मीकि रामायण (संस्कृत)और तुलसीदास कृत “रामचरितमानस” में लव -कुश कांड नहीं है। लव -कुश कांड उत्तर रामायण में वर्णित है जिसे कुछ विद्वान बाल्मीकि रचित और कुछ के मतानुसार किसी अन्य कवि द्वारा रचित मानते हैं। रामानंद सागर के रामायण सीरियल में इसे उत्तर रामायण के रूप में दर्शाया गया है।

रामानंद सागर ने चैनल से सीता वनवास एपिसोड में कुछ बदलाव करने की अनुमति मांगी. उन्होंने कहा कि राम भक्त के रूप में वे सीता के त्याग के पीछे राम के कारण को नहीं मान सकते हैं और वाल्मिकी जी की रामायण में लव कुश का हिस्सा है ही नहीं. फिर रामानंद सागर ने लव कुश कांड तैयार किया.

घरों में रामायण पाठ के वक्त लवकुश कांड क्यों नहीं पढ़ा जाता है?

अभिषेक जी, अगर तो वाल्मीकि रामायण का पाठ रखा जाता है, तब तो , उसका, बालकांड,जिसमें भी लव कुश का वर्णन है से ले कर , उत्तरकाण्ड तक , जिसे आपने भ्रम से लव कुश काण्ड बना डाला है., पढ़ा जाता है ।

तुलसीदास जी की रामचरितमानस, का पाठ, रखने पर , उत्तरकाण्ड में , लव कुश का केवल ज़िक्र है ।

कुछ , अतिउत्साहित लेखकों ने , रामचरितमानस में, ८ वॉ काण्ड, लव कुश , का वर्णन बना कर , जोड़ दिया है । यह बिलकुल अनुचित है । रामचरितमानस में, तुलसीदास जी ने, बालकांड में ही, यह बतलाया है कि, यह रचना, मानस यानि की, एक भक्ति भाव से भरा , सरोवर है, जो कि भगवान राम का चरित्र चित्रण करता है । इसके ४ घाट हैं, और ७ सीढ़ियाँ हैं, जोकि ७ काण्ड ही हैं । तब ८ वॉ काण्ड या सीढ़ी कहॉं से आएगी । इसके एक घाट पर, शिव जी-पार्वती जी, दूसरे घाट पर, याज्ञवल्क्य- भरद्वाज, तीसरे घाट पर काकभुशुंडी- गरुड़, तथा चौथे घाट पर स्वयं तुलसीदास जी तथा भक्त गण कथा कहते -सुनते हैं ।

अब , सर्व मान्य रामचरितमानस में, जब तथा कथित, लव-कुश काण्ड है ही नहीं, तब पढ़ने-पढ़ाने का प्रश्न ही नहीं उठता।

लव कुश रामायण की अनुवर्ती श्रृंखला है और उत्तर कांड पर आधारित है, जो रामायण का अंतिम अध्याय है। इसमें राम और सीता के जुड़वां पुत्रों लव और कुश के जीवन को दर्शाया गया है।

राम के राज्याभिषेक के बाद, उन्हें सीता की गर्भावस्था के बारे में पता चलता है और अयोध्या के नागरिक उनके चरित्र की गपशप करते हैं क्योंकि उन्हें लंका में रहने के लिए मजबूर किया गया था। वह अपनी पत्नी पर भरोसा करता है और उस मामले को छोड़ने का फैसला करता है लेकिन सीता को इस बारे में पता चल जाता है और राम से उसे छोड़ने के लिए कहता है जो एक राजा के रूप में उसका कर्तव्य है और वह जंगलों में जाने का फैसला करती है। उसका भाई लक्ष्मण इसका विरोध करता है लेकिन व्यर्थ में और उसे जंगल में छोड़ देता है जहां वह ऋषि वाल्मीकि से मिलती है जो राम के जीवन की घटना रामायण की रचना कर रहे थे। ऋषि वाल्मीकि उन्हें अपनी पुत्री के रूप में स्वीकार करते हैं। उन्हें उनके आश्रम में आश्रय प्रदान किया जाता है। दूसरी ओर, राम को सीता की याद आ रही है और राजा जनक (सीता के पिता) उनसे मिलने जाते हैं और उन्हें पता चलता है कि सीता की माँ सुनयना अपनी बेटी के परित्याग का समाचार पाकर बीमार पड़ गई हैं। राम मिथिला के पास जाते हैं और उससे माफी मांगते हैं।

अयोध्या वापस आने के बाद, कई ऋषि मधुपुर के अत्याचारी राजा लवणासुर के बारे में शिकायत करते हैं और राम अपने भाई शत्रुघ्न को उसे मारने के लिए भेजते हैं। मधुपुर के रास्ते में, वह ऋषि वाल्मीकि से आश्रम में मिलता है जहाँ सीता गुप्त रूप से रह रही थी। वह अनजाने में अपने भतीजों लव और कुश का नामकरण संस्कार करता है। वह लवणासुर का वध करने में सफल रहा और उसे मधुपुर के राजा के रूप में ताज पहनाया गया।

जैसे-जैसे साल बीतते हैं, लव और कुश को ऋषि वाल्मीकि के अधीन प्रशिक्षित किया जाता है और उनके द्वारा रामायण सिखाई जाती है। कुश के मन में हमेशा एक सवाल था कि राम ने सीता का परित्याग क्यों किया, यह नहीं जानते हुए कि सीता कोई और नहीं बल्कि उनकी अपनी माँ हैं क्योंकि वे उन्हें वनदेवी के नाम से जानते थे। 12 साल बाद, राम एक अश्वमेध यज्ञ का आयोजन करते हैं और उनके द्वारा घोड़े को रोक दिया जाता है क्योंकि वे अपने सवालों का जवाब जानना चाहते थे। वे लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के साथ लड़ते हैं और अंत में अपने पिता के साथ लड़ने वाले होते हैं जब वाल्मीकि हस्तक्षेप करते हैं और लड़ाई समाप्त करते हैं। शाम को वे सीता के पास जाते हैं और उन्हें दिन की घटना के बारे में बताते हैं और सीता उन्हें बताती हैं कि राम उनके पिता हैं। वे रामायण के श्लोकों को गाते हुए अयोध्या की यात्रा करते हैं और नागरिकों को देवी सीता पर संदेह करने की उनकी गलती का एहसास कराते हैं। राम महाकाव्य रामायण को सुनने के लिए उत्सुक हैं। वह लव और कुश को अपने महल में आमंत्रित करता है और अपने परिवार और अन्य दरबारियों के साथ उनकी बातें सुनता है। यह तब होता है जब उसे पता चलता है कि वे दोनों उसके पुत्र हैं जबकि अयोध्या के नागरिक अभी भी सीता के चरित्र को साबित करने के लिए कहते हैं। सीता को बुलाया जाता है और राम उसे प्रमाण देने के लिए कहते हैं। सीता ने अंतिम प्रमाण देने का फैसला किया और अपनी जन्म माँ भूमि देवी (पृथ्वी देवी) को बुलाकर यह कहकर उनके साथ चली गईं कि यह स्थान महिलाओं के लिए सुरक्षित नहीं है और उनका यहाँ सम्मान नहीं है; लव और कुश को उनके पिता के पास छोड़ते है।

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