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RSS के सर्वे में महायुति आगे और NCP के सर्वे में मविआ को बहुमत

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RSS के सर्वे में महायुति आगे और NCP के सर्वे में मविआ को बहुमत

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टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट

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मुंबई। विधानसभा चुनाव के लिए नामांकन भरने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। महायुति के घटक दलों ने उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी कर दी है। महाविकास आघाडी में सीट शेयर पर लेटलतीफी हूई है। शिवसेना यूबीटी ने भी अपने उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी कर दी है। इस बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) एक इंटरनल सर्वे सामने आया है जिसमें महायुति को 160 सीटें मिलने का दावा किया गया है। सर्वे में कहा गया है कि बीजेपी-शिवसेना-एनसीपी का भगवा गठबंधन लोकसभा चुनाव में मिले झटके से उबर चुका है और विधानसभा चुनाव में बड़ी जीत दर्ज करेगा। जबकि NCP चीफ शरदचंद्र पवार खेमे के सर्वेक्षण के मुताबिक मायानगरी मुंबई पनवेल और रायगढ में शिवसेना UBT के हित मे माहौल देखा जा रहा है। उनके सर्वेक्षण के मुताबिक मुंबई मराठवाडा और पश्चिम महाराष्ट्र का आंबेडकरी समाज और मुस्लिम समुदाय का मतदाता यूबीटी शिव सेना और राकापा शरद पवार के पक्ष मे दिखाई पड रहा है। महाराष्ट्र की 288 सीटों पर सर्वे के मुताबिक महयुती की लडकी बहना योजना मे मात्र 30% महिलाओं को ही आर्थिक लाभ मिल पाया है। परिणामस्वरूप 70 % महिलाओ मतदाता इस योजना से सख्त नाराज दिखाई दे रही है।

आरएसएस से जुड़े एक व्यक्ति का कहना है कि संघ की ओर से माहौल जानने के लिए चुनाव से पहले गोपनीय तरीके से आंतरिक सर्वेक्षण कराया जाता है। उस सर्वे रिपोर्ट के आधार पर ही बीजेपी की चुनावी रणनीति बनाई जाती है और आबादी की ध्यान में रखकर उम्मीदवारों का चयन किया जाता है। अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में संघ ने अपने चैनल के माध्यम से महाराष्ट्र की सभी 288 सीटों पर सर्वे कराया है।

सर्वे में किसे कितनी सीटें

उस सर्वेक्षण के मुताबिक, महायुती 160 सीटों पर जीत दर्ज करने की ओर बढ़ रहा है। इसमें बीजेपी को 90 से 95 सीटें मिलने की संभावना है, शिंदे की शिवसेना को 40 से 50 सीटें और अजित पवार की एनसीपी को 25 से 30 सीटें मिल सकती हैं। यह सर्वे उन मतदाताओं पर केंद्रित था, जिन्होंने लोकसभा चुनावों में बीजेपी से असंतुष्ट होकर विपक्षी इंडिया गठबंधन को वोट दिया था। बहरहाल अब यह देखना रोचक होगा कि क्या यह सर्वेक्षण भविष्यवाणी सही साबित होती है या चुनावी मैदान में कोई नया मोड़ आता है।

 

धर्म शास्त्रों के मुताबिक

 

*”त्रिया चरित्रम् मनुशस्य भाग्यम् कुत: ना जानामि मनुष्य:”*

 

अर्थात: महिलाओं का चरित्र और मनुष्य के भाग्य को कोई नहीं जान सकता तो फिर मनुष्य क्या जानेगा?

 

दरअसल मे 95 % राजनेता कोई सत्यवादी और ईमानदार नहीं होता है? अपितु 90% नेता महान अन्यायकारी और भ्रष्टाचारी होता है? हालकि राजनीति में सब जायज माना गया है? राजनीति में नाजायज कुछ भी नहीं होता है। और चुनाव में तो झूठ छल कपटरुपा अश्वासन और विश्वासघात होता है? दरअसल में महाराष्ट्र की जनता-जनार्दन मतदाता बदलाव चाहता है।

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