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भारत की स्वर्णरेखा नदी की तलहटी मे मौजूद है अपार स्वर्ण भंडार

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जमशेदपुर/टाटानगर। भारत कई अजूबों और अनसुलझे रहस्यों का देश है। ऐसा ही एक रहस्य झारखंड के अनछुए इलाकों से होकर बहती स्वर्णरेखा नदी है। आपको जानकर हैरानी होगी कि इस नदी के भूगर्भ मे अपार स्वर्ण भंडार छुपा हुआ है स्वर्णरेखा नदी के पानी की धार मे स्वर्ण धातुय के कण बहते हैं।यह नदी झारखंड पश्चिम बंगाल और ओडिशा से होकर बहती है बहती है। स्वर्ण अयस्क उगलने वाली स्वर्णरेखा नदी की कुल लंबाई 474 किमी है।
स्वर्णरेखा नदी तटवर्तीय नगडी गांव के एक छोर से कोयला और दूसरे छोर से स्वर्ण रेखा नदी का उद़्गम होता है। झारखंड की राजधानी रांची के पास स्थित उद्गम स्थल से निकलने के बाद ये नदी किसी भी दूसरी नदी से जाकर नहीं मिलती, ल्कि सीधी बंगाल की खाड़ी में जाकर गिरती है। इसकी प्रमुख सहायक नदियां कांची और करकरी हैं। माना जाता है कि करकरी नदी से बहकर ही सोने के कण स्वर्ण रेखा में मिल जाते हैं।

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देश में कहीं रेगिस्तान है, कहीं हरियाली तो कहीं वादियां। कहीं समुद्र तट के बेहतरीन नजारे हैं, तो कहीं दूर-दूर तक फैली नदियां हैं। भारत में वह सबकुछ है जो किसी देश को बेहद खूबसूरत बनाते हैं।
दुनिया में ऐसा देश कोई दूसरा नहीं। यहां कई हरे–भरे पहाड़ हैं, तीनों ओर हजारों किलोमीटर कीसमुद्री तट रेखा है, जिसमें हजारों टापू और बीच हैं। यहां हिमालय और बर्फ से ढकी पहाड़ियां भी हैं, तो दूसरी ओर तपते रेगिस्तान भी।
भारत की मिट्टी को दुनिया की सबसे बड़ी नदियों में से कुछ महत्वपूर्ण नदियों ने उपजाऊ बनाया है। विश्व की कुछ गिनी–चुनी पुरानी नदी–घाटी सभ्यताएं भारत में ही विकसित हुई हैं। यहां उत्तर में सिंधु, हिमालय के तराई क्षेत्र में गंगा का विशाल मैदान, पूर्वोत्तर में ब्रह्मपुत्र, मध्य में नर्मदा और दक्षिण में कावेरी व गोदावरी का विशाल बेसिन और सहायक नदियों का संजाल है।

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*भारत की प्रमुख नदियों के नाम*

भारत की मुख्य नदियों में गंगा, यमुना, सरस्वती,सिंधु,सतलज, झेलम, कृष्णा, कावेरी, गोदावरी, गोमती, महानदी, नर्मदा,सोनभद्र,सरयू, क्षिप्रा,चन्द्रभागा,कोसी,घाघरा,चम्बल,बैरवा और ब्रह्मपुत्र बड़ी नदियां तो हैं ही, परंतु इनकी सहायक नदियां भी सैकड़ों की संख्या में हैं।परंतु स्वर्ण धातु उगलने वाली नदी स्वर्णरेखा नदी की महिमा ही निराली है।जहां अपार स्वर्ण भंडार छुपा हुआ है।

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