Breaking News

जानिए कुंडली में मांगलिक दोषों की वजह से होता है विवाह में विलंब इससे जुड़े मिथक, प्रभाव और उपाय योजनाएं

Advertisements

जानिए कुंडली में मांगलिक दोषों की वजह से होता है विवाह में विलंब इससे जुड़े मिथक, प्रभाव और उपाय योजनाएं

Advertisements

टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट

Advertisements

ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार यदि किसी की जन्म पत्रिका के लग्न भाव, चतुर्थ भाव, सप्तम भाव, अष्टम भाव, द्वादश भाव में यदि मंगल स्थित हो तो कुंडली में मंगल दोष होता है। मांंगलिक दोष का सबसे अधिक नकारात्मक प्रभाव विवाह, वैवाहिक जीवन औरतें पर संतान जन्म होने में विलंब पर पड़ता है। विवाह में बाधा, वैवाहिक जीवन में कलह आदि इसके सामान्य प्रभाव है।

 

विस्तार वैदिक ज्योतिष में मंगल देव हमारे रिश्तों पर, मस्तिष्क पर आधिपत्य रखते हैं। नाड़ी ज्योतिष के अनुसार महिला जातक की पत्रिका में मंगल देव पति का प्रतिनिधित्व करते हैं। प्रत्येक पत्रिका के लिए मंगल की स्थिति बहुत ही महत्वपूर्ण होती है। मंगल अर्थात कुज के द्वारा ही बनता है मंगल दोष।

 

जब भी किसी जातक/जातिका की पत्रिका में मंगल विशेष भावों से जुड़े हों या उस पर नकारात्मक प्रभाव डाल रहे हैं तो वह कुज दोष से प्रभावित होगा। कुज दोष का सबसे अधिक नकारात्मक प्रभाव विवाह, वैवाहिक जीवन पर पड़ता है। विवाह में बाधा, वैवाहिक जीवन में कलह आदि इसके सामान्य प्रभाव है।

 

कभी-कभी इसका प्रभाव इतना प्रबल होता है कि वैवाहिक जीवन में विच्छेदन की स्थिति भी आ जाती है। शास्त्रों में ऐसा वर्णित हैं मांगलिक व्यक्ति का विवाह समान भाव मांगलिक व्यक्ति से ही होना उत्तम होता है। जिससे इस दोष का शमन होता है। यदि ऐसा नहीं किया जाता तो समस्याओ का सामना करना पड़ता है।

मांगलिक दोष या कुज दोष क्या है?

यदि किसी पत्रिका के लग्न भाव, चतुर्थ भाव, सप्तम भाव, अष्टम भाव, द्वादश भाव में यदि मंगल स्थित हो तो कुंडली में मंगल दोष होता है।

 

मंगल दोष के प्रभाव

 

जब लग्न में ये स्थिति होती है तो जातक का स्वभाव अत्यधिक तेज, गुस्सैल, और अहंकारी होता है।

चतुर्थ में मंगल जीवन में सुखों में कमी करता है और पारिवारिक जीवन में कठिनाइयां आती हैं।

सप्तम भाव में मंगल होने से वैवाहिक सम्बन्धों में कठिनाई आती है।

अष्टम भाव में स्थित मंगल विवाह के सुख में कमी, ससुराल के सुख में कमी या ससुराल से रिश्ते बिगड़ जाते हैं।

द्वादश भाव का मंगल वैवाहिक जीवन में कठिनाई, शारीरिक क्षमताओं में कमी, क्षीण आयु, रोग, कलह को जन्म देता है

मांगलिक दोष से कुछ बातें ऐसी जुडी है जो सत्यता से बिलकुल उलट है। जैसे – यदि मांगलिक और अमांगलिक जातक जातिका का विवाह हो जाए तो उनका विवाह विच्छेदन निश्चित है। लेकिन ऐसा होना अनिवार्य नहीं है जीवन में कलह कठिनाई आ सकती हैं। लेकिन विच्छेदन होना अनिवार्य नहीं है। मांगलिक जातिका का वट वृक्ष से विवाह अवश्य कराना चाहिए। ये भी पूर्णता सत्य नहीं। कुछ मान्यता कहती हैं कि मंगलवार को जन्मा व्यक्ति मांगलिक होता है। ये गलत है किसी भी दिन जन्मा जातक मांगलिक हो सकता है।

कुछ भ्रांतिया है कि यदि मंगल के साथ गुरु या शनि की युति होगी तो मंगल दोष समाप्त हो जाता है ये केवल भ्रम है। गुरु की दृष्टि यदि मंगल पर हो, केंद्र भाव में गुरु हो तो भी मंगल दोष समाप्त हो जाता है। यह सत्य नहीं है। दरअसल, कोई भी ग्रह मंगल दोष को समाप्त नहीं कर सकता है। यदि मंगल अस्त है तो मंगल दोष का प्रभाव कम नहीं होता है।

 

27 वर्ष की आयु के बाद ये दोष समाप्त हो जाता है ये भ्रम तो इतनी गहराई तक फैला है कि इसको समाप्त करना असंभव है। कुछ रूढ़िवादी ये मानते है कि लड़का मांगलिक है तो लड़की का मांगलिक होना अनिवार्य नहीं, जिसका भुगतान उन दम्पति को आजीवन करना पड़ता है।

 

ज्योतिष शास्त्र किसी भी योग और दोष को स्पष्ट रूप से बताने में सक्षम है। कुछ पूजा पाठ दान आदि से उनमें कुछ सुधार भी संभव है, लेकिन यह कहना अनुचित होगा कि किसी दोष को पूर्णतः समाप्त किया जा सकता है। यदि कोई जातक मांगलिक है तो उसका केवल यह परिहार है कि उसका सम्बन्ध भी मांगलिक से ही किया जाए।

कुछ सामान्य उपाय करके मांगलिक दोष को थोड़ा नियंत्रित किया जा सकता है या जिन का विवाह मांगलिक से हो गया है वो इन उपायों को कर के कुछ शांति करने का प्रयास कर सकते हैं-

सबसे बड़ा उपाय इसके लिए है जातक का आत्म नियंत्रण, अहंकार क्रोध पर नियंत्रण।

इसके अतिरिक्त श्री हनुमान चालीसा का पाठ करें जो पीले कागज़ पर लाल स्याही से लिखी हो प्रतिदिन श्रद्धा से पाठ करें।

भगवान शिव शक्ति की संयुक्त पूजा करें।

शिवलिंग पर लाल रंग के पुष्प अर्पित करें।

लाल मसूर का मंगलवार को दान करें। गुड़ का दान भी कर सकते हैं।

मंगलवार को मजदूरों को खाना खिलाएं।

ये कुछ सामान्य उपाय हैं जिन्हे कोई भी जातक/जातिका कर सकते हैं। उज्जैन स्थित मंगलनाथ जी की पूजा अनुष्ठान भी मंगल दोष हेतु की जाती है लेकिन ये तभी करें जब आपकी पत्रिका के अनुसार ज्योतिषी आपको सलाह दें

 

मांंगलिक दोष निवारण के उपाय

 

ज्योतिषियों की मानें तो कुंडली में मंगल दोष लगने पर जातक की शादी में बहुत देर होती है। यह दोष कुंडली के प्रथम द्वितीय चतुर्थ सप्तम अष्टम और द्वादश भाव में मंगल के रहने पर लगता है। इस स्थिति में मंगल दोष निवारण अनिवार्य है। अगर आप भी मांगलिक दोष से पीड़ित हैं तो मंगलवार के दिन ये उपाय जरूर करें।

मंगल दोष को दूर करने के लिए करें ये आसान उपाय, सभी संकटों से निजात मिल सकता है।

 

ज्योतिष कुंडली देखकर व्यक्ति के भूत, भविष्य और वर्तमान समय की गणना करते हैं। इससे जातक के करियर, कारोबार, प्रेम और विवाह, संतान और शत्रु समेत अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां मिलती हैं। कुंडली में ग्रहों को दो वर्गों में बांटा गया है। इनमें अशुभ ग्रहों की श्रेणी में मंगल, राहु-केतु और शनि को रखा गया है। ज्योतिषियों की मानें तो कुंडली में मंगल दोष लगने पर जातक की शादी में बहुत देर होती है। यह दोष कुंडली के प्रथम, द्वितीय, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम और द्वादश भाव में मंगल के रहने पर लगता है। इस स्थिति में मंगल दोष निवारण अनिवार्य है। अगर आप भी मांगलिक दोष से पीड़ित हैं, तो मंगलवार के दिन ये उपाय जरूर करें। आइए जानते हैं-

 

मंगल दोष के उपाय

– अगर आप मंगल दोष से निजात पाना चाहते हैं, तो मंगलवार के दिन हनुमान जी की पूजा-उपासना करें। साथ ही पूजा के समय सुंदरकांड का पाठ करें।

 

– मंगल दोष से छुटकारा पाने के लिए हर मंगलवार के दिन लाल चीजों का दान करें। आप लाल मिर्च, गुड़, लाल रंग के कपड़े, शहद, लाल रंग की मिठाई, मसूर की दाल आदि चीजों का दान करें। लाल मिर्च का दान करने से मंगल दोष का प्रभाव समाप्त हो जाता है।

 

– मंगलवार के दिन स्नान-ध्यान करने के बाद लाल वस्त्र धारण कर विधि-विधान से हनुमान जी की पूजा-उपासना करें। इस समय हनुमान जी को सिंदूर अर्पित करें। इस उपाय को हर मंगलवार के दिन करें।

 

– अगर आपकी शादी में बाधा मंगल दोष की वजह से आ रही है, तो मंगलवार के दिन उज्जैन स्थित मंगलनाथ मंदिर में भात पूजन करें। धार्मिक मत है कि मंगलनाथ मंदिर में भात पूजा करने से मंगल दोष का प्रभाव समाप्त हो जाता है।

 

– ज्योतिषियों की मानें तो मंगलवार के दिन नीम का पेड़ लगाने से मंगल दोष का प्रभाव खत्म हो जाता है। नीम के पेड़ की देखरेख और सेवा करने से भी मंगल दोष दूर होता है।

 

डिस्क्लेमर-”इस लेख में निहित किसी भी जानकारी/सामग्री/गणना में निहित सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्म ग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारी आप तक पहुंचाई गई हैं। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है, इसके उपयोगकर्ता इसे महज सूचना के तहत ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता की ही रहेगी।

Advertisements

About विश्व भारत

Check Also

(भाग:301)चक्रवर्ती सम्राट दशरथ-कौशल्यानंन्द नंदन मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम जन्म और रामनवमी की महिमा

(भाग:301)चक्रवर्ती सम्राट दशरथ-कौशल्यानंन्द नंदन मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम जन्म और रामनवमी की महिमा टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: …

(भाग:300) देवी देवता और असुर भी करते हैं माता सिद्धिदात्री की नवधा भक्ति पूजा अर्चना और प्रार्थना

(भाग:300) देवी देवता और असुर भी करते हैं माता सिद्धिदात्री की नवधा भक्ति पूजा अर्चना …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *