बिजली करंट से बाघों के शिकार का पर्दाफाश
टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट
छिन्दवाडा। मध्यप्रदेश के छिन्दवाडा जिले के मोगली अभयारण्य की सीमा पर बाघिन का बिजली करेंट लगाकर शिकार करने का मामला वन विभाग के हाथों मे लगा है। पता चला है कि शाम ढलते ही शिकारी लोग वन्य प्राणी विचरण परिक्षेत्र में बिजली के तार बिछा दिए जाते हैं.और बाद मे चालू बिजली तारों मे इलेक्ट्रिसियनों की मदद से जोड़ दिए जाते है. और बिजली करंट से मरे जानवरों के मास और चमडे की तस्करी की जाती है. यह मूक वन्यजीवों के शिकार का खूनी खेल पिछले कई सालौं से चला आ रहा है. यह समाचार अधिकांश वनवासी लोगों को विदित ही है. जिसमे हिरण तेंदुए, बारहसिंगा, बाघ बाघिन और खरगोश के शिकारों का समावेश है.
हालही मोगली अभयारण्य और ग्राम जीरेवाड़ा की सीमा पर 4-5 वर्ष आयु की एक मादा बाघिन का शव बरामद हुआ है। प्रारंभिक जांच में बाघिन की मौत का कारण विद्युत करंट माना जा रहा है। शव के पास करंट से संबंधित अन्य साक्ष्य भी पाए गए हैं, जो इस संभावना को मजबूत करते हैं। घटना की जानकारी मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी।
उप संचालक, पेंच टाइगर रिजर्व, सिवनी (म.प्र.) रजनीश कुमार सिंह ने पुष्टि की है कि शव के समीप करंट लगाने के अन्य साक्ष्य भी पाए गए हैं, जो इस घटना में मानव हस्तक्षेप की ओर संकेत कर रहे हैं। इस मामले में विस्तृत जांच जारी है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस घटना ने वन्यजीव संरक्षण और अवैध गतिविधियों के खिलाफ प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता को एक बार फिर उजागर किया है।
पेंच टाइगर रिजर्व प्रशासन ने क्षेत्रवासियों से अपील की है कि वे वन्यजीव संरक्षण में सहयोग करें और किसी भी अवैध गतिविधि की जानकारी तत्काल संबंधित अधिकारियों को दें।
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