ब्रह्मज्ञानी को मारना य धोखे से मारने की योजना बनाना महापाप माना गया है टेकचंद्र शास्त्री 9822550220 नई दिल्ली।भारतीय वैदिक सनातन धर्म गरुण पुराण के अनुसार किसी ब्रह्म ज्ञानी को मारना-मरवाना या धोखे से मनवाना तथा उसे परेशान करना महापाप का भागीदार होता है?अकाल मृत्यू के पश्चात वह ब्रह्म राक्षस बनकर दोषियों से अपनी मौत का बदला लेता है. …
Read More »ब्रह्मज्ञानी को मारना या न मारने की योजना बनाना महापाप पाखण्ड माना गया
ब्रह्मज्ञानी को मारना या न मारने की योजना बनाना महापाप पाखण्ड माना गया टेकचंद्र शास्त्री 9822550220 नई दिल्ली।भारतीय वैदिक सनातन धर्म गरुण पुराण के अनुसार किसी ब्रह्म ज्ञानी को मारना-मरवाना या उसे परेशान करना महापाप का भागीदार होता है?अकाल मृत्यू के पश्चात वह ब्रह्म राक्षस बनकर दोषियों से अपनी मौत का बदला लेता है. हत्यारों बहुत तकलीफ पंहुचाता हैरान …
Read More »राजस्थान में माता सती रानी मंदिर में उमड़ा भक्तों की भीड
राजस्थान में माता सती रानी मंदिर में उमड़ा भक्तों की भीड टेकचन्द्र शास्त्री: 9822550220 सीकर। राजस्थान रै मारवाड़ी माता सती रानी मंदिरां री हाल री खबरां मांय मुख्य रूप सूं भव्य झुंझुनूं मंदिर रो जीर्णोद्धार, विभिन्न स्थानां माथै वार्षिक मंगल पाठ अर जन्मोत्सव जैड़ा धार्मिक कार्यक्रम, अर आपदा प्रबंधन री नकली अभ्यास, जठै मारवाड़ी समुदाय आपरी कुलदेवी री …
Read More »शिव मंदिर को नोटिस जारी करने वाले अधिकारी नौकरी से निलंबित
शिव मंदिर को नोटिस जारी करने वाले अधिकारी नौकरी से निलंबित टेकचंद्र शास्त्री: 9822550220 राजस्थान। राजधानी जयपुर में शिव मंदिर को नोटिस जारी करना जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) के एक अधिकारी को भारी पड़ गया। यहां वैशाली नगर स्थित मंदिर को मिले नोटिस के बाद विवाद खड़ा हो गया, जिसके बाद प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए प्रवर्तन अधिकारी …
Read More »केलीकुंज आश्रम पहुंचे महंत नृत्यगोपालदास: संत प्रेमानंद ने पैर भी पखारे
केलीकुंज आश्रम पहुंचे महंत नृत्यगोपालदास: संत प्रेमानंद ने पैर भी पखारे टेकचंद्र शास्त्री: 9822550220 मथुरा। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपालदास गुरुवार सुबह संत प्रेमानंद से भेंट करने के लिए परिक्रमा मार्ग स्थित श्रीराधा केलिकुंज आश्रम पहुंचे। दो बड़े संतों की यह मुलाकात आध्यात्मिक वातावरण और भक्ति-भाव से भरपूर रही है। प्रेमानंद जी महाराज ने द्वार …
Read More »राम मंदिर मे ध्वजारोहण पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने उठाए सवाल
राम मंदिर मे ध्वजारोहण पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने उठाए सवाल टेकचंद्र शास्त्री: 9822550220 वाराणसी।जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी महाराज ने कहा कि यहां सिर्फ और सिर्फ सब मनमाने तरीके से किया जा रहा है, शास्त्रों का ध्यान नहीं रखा जा रहा है. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती अयोध्या मे मंगलवार को एक भव्य ध्वजारोहण कार्यक्रम आयोजित होने जा रहा है. …
Read More »ब्रह्म मुहूर्त में करें ये 3 काम, कष्ट मिटेगा दोगुनी होगी आय
ब्रह्म मुहूर्त में करें ये 3 काम, कष्ट मिटेगा दोगुनी होगी आय टेकचंद्र शास्त्री: 9822550220 प्रयागराज। ब्रह्म मुहूर्त दिन का वह पवित्र समय है जो सूर्योदय से लगभग 1.5 घंटे पहले होता है. आमतौर पर यह समय सुबह 4:00 बजे से 5:30 बजे तक माना जाता है. इसे हिंदू धर्म में अत्यंत शुभ और लाभकारी समय माना गया …
Read More »शिवपुराण कथा श्रवण से प्राणी जन्म-मृत्यु के बंधनों से होता है मुक्त
शिवपुराण कथा श्रवण से प्राणी जन्म-मृत्यु के बंधनों से होता है मुक्त टेकचंद्र शास्त्री: 9130558008 कटनी। मध्यप्रदेश के कटनी उपनगरीय क्षेत्र न्यू कटनी जंक्शन के व्यासपीठ श्रीहित प्रवीणकृष्ण दासजी ब्रजरजोउपासक के सानिध्य में लगातार नव दिनों तक चले शिवपुराण कथा में यजमान के रूप में सम्मलित हुए, उनके सैकड़ों अनुयायिओं ने गुरदेव महराज के मुखार बिंदु से बाराणसी स्थित …
Read More »उज्जैन मे भगवान कालभैरव का जन्म दिवस हर्षोल्लास पूर्वक मनाया
उज्जैन मे भगवान कालभैरव का जन्म दिवस हर्षोल्लास पूर्वक मनाया टेकचंद्र शास्त्री: 9822550220 उज्जैन के भैरवगढ में भगवान काल भैरव का जन्मोत्सव, जिसे काल भैरव जयंती के रूप में भी जाना जाता है, आज 12 नवंबर 2025 को अत्यंत हर्षोल्लास और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है। यह त्योहार मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को …
Read More »हिन्दू समाज मे मन मुटाव और आपसी भेदभाव की वजह से एकता असंभव
हिन्दू समाज मे मन मुटाव और आपसी भेदभाव की वजह से एकता असंभव टेकचंद्र शास्त्री: 9822550220 नई दिल्ली। पुरातन काल से सनातन हिन्दू धर्म समाज मे आपसी फूट मनमुटाव और भेदभाव की वजह से एकता असंभव है.हिन्दू धर्म में ऊंच-नीच की खाई, जात-पात की खाई और अमीर-गरीब की खाई से जुड़े विचार जटिल हैं, क्योंकि धार्मिक ग्रंथों की मूल …
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