(भाग:350) प्राणियों के लिए दोषरहित आचरण करना चाहिए गौतम बुद्ध के अनमोल विचार टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट बुद्ध शाक्यमुनि की छठी शताब्दी के अंत में बुद्ध की पहली जीवन शिक्षा के बारे में कहा जाता है कि उन्हें शिष्यों की पीढ़ियों द्वारा लिखा गया था, इससे पहले कि उन्हें लिखा गया और धर्मग्रंथ के रूप में संहिताबद्ध किया गया, …
Read More »(भाग:348)धर्म शास्त्रों के अनुसार सूर्य देव के प्रकोप से नौतपा में चिलचिलाती तेज धूप
(भाग:348)धर्म शास्त्रों के अनुसार सूर्य देव के प्रकोप से नौतपा में चिलचिलाती तेज धूप टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट शास्त्रों के अनुसार, जब सूर्य देव ज्येष्ठ महीने में रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते हैं, तब दिन पर दिन गर्मी बढ़ती जाती है. रोहिणी नक्षत्र को चंद्र देव का नक्षत्र माना जाता है. सूर्य देव के रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करने …
Read More »(भाग:347)निसर्ग प्रकृतिक परमात्मा संसार की निशुल्क सेवा प्रदान कर रहा है
(भाग:347)निसर्ग प्रकृतिक परमात्मा संसार की निशुल्क सेवा प्रदान कर रहा है टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट यह कटु सत्य है कि प्रकृतिक निसर्ग परमात्मा सकल संसार ही नहीं अपितु सकल ब्रह्मांड की निशुल्क सेवा प्रदान कर रहा है? जैसे निशुल्क प्राणवायू, चंद्र सीतलता-सूर्य ऊर्जा,आकाश गंगाजल और सकल विश्व ब्रह्मांड का संचालन संचलन और निर्देशन और परिपालन कर रहा है? परंतु …
Read More »(भाग:346)यमराज को लौटना पडा खाली हाथ?श्री शिव द्धारा मार्कण्डेय ऋषि मिला दीर्घायु का वरदान
भाग:346)यमराज को लौटना पडा खाली हाथ?श्री शिव द्धारा मार्कण्डेय ऋषि मिला दीर्घायु का वरदान टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट मार्कंडेयश्वर। परमं श्री शिवभक्त मार्कंडेय ऋषि देवस्थान से यमराज भीखाली हाथ वापस लौटना पड़ा था? मार्कण्डेय ऋषि को देवाधिदेव भगवान शिव ने दीर्घायु का वरदान दिया था? इस मंदिर देवस्थान में दिवाली से एक दिन पूर्व नरक चौदस पर …
Read More »(भाग:345) नि:स्वार्थ सेवा कर्म भाव ही कामयाबी और प्रगति का मूल मंत्र
(भाग:345) नि:स्वार्थ सेवा कर्म भाव ही कामयाबी और प्रगति का मूल मंत्र टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट नि:स्वार्थ भाव से सेवा कर्म का भाव रखना ही जीवन में कामयाबी और प्रगति का मूलमंत्र है। निस्वार्थ भाव रखते हुए समाज हित में लगातार कार्य करना ही मानव जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है। -सेवा करने से हमेशा अच्छे संस्कार हमें मिलते …
Read More »(भाग:344) निसर्ग परमात्मा मनुष्यों को अच्छे गुण धर्म, कर्म और स्वभाव में प्रवृत करता है।
(भाग:344) निसर्ग परमात्मा मनुष्यों को अच्छे गुण धर्म, कर्म और स्वभाव में प्रवृत करता है। टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट एक बार एक आचार्य अपने शिष्यों की कक्षा ले रहे थे। उन्होंने गुरु द्रोणाचार्य का उदहारण दिया। गुरु द्रोणाचार्य ने एक बार युधिष्ठिर और दुर्योधन की परीक्षा लेने का निश्चय किया। द्रोणाचार्य ने युधिष्ठिर से कहा की जाओ और कहीं …
Read More »(भाग:343)नैसर्गिक परमात्मा संसार संचलन के लिए निशुल्क और निःस्वार्थ सेवा प्रदान कर रहा है
(भाग:343)नैसर्गिक परमात्मा संसार संचलन के लिए निशुल्क और निःस्वार्थ सेवा प्रदान कर रहा है टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट नैसर्गिक प्राकृतिक परमात्मा संसार को निशुल्क और निःस्वार्थ सेवा प्रदान करते आ रहा है।जैसे बहुमूल्य आकाश गंगाजल,प्राणवायू, ऊर्जा, सीतलता के द्धारा जगत का निर्माण निर्देशन और प्रबंधन कर रहा है।विनाश और सृजन भी कर रहा है।निसर्ग परमात्मा जिसका वह …
Read More »(भाग:342)वेदमाता गायत्री की भक्ति से मिलता है आयुर्वल प्राणशक्ति कीर्ती और ब्रम्हतेज
(भाग:342)वेदमाता गायत्री की भक्ति से मिलता है आयुर्वल प्राणशक्ति कीर्ती और ब्रम्हतेज टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट अथर्ववेद १९- ७१ में गायत्री की स्तुति की गयी है, जिसमें उसे आयु, प्राण, शक्ति, कीर्ति, धन और ब्रह्मतेज प्रदान करने वाली कहा गया है। विश्वामित्र का कथन है—’गायत्री के समान चारों वेदों में मन्त्र नहीं है। सम्पूर्ण वेद, यज्ञ, दान, तप गायत्री …
Read More »(भाग:341) चंचल मन मतंग माने नहीं? जब लग धोखा ना खाए
(भाग:341) चंचल मन मतंग माने नहीं? जब लग धोखा ना खाए टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट चंचल मन मतंग माने नहीं जब लग धोखा न खाए। जैसे बिधवा स्त्री गर्भ रहे पश्ताय।। इसलिए चंचल मन को दुनियादारी से खींचकर उसे एक प्रकार से स्थिर करके रखना होगा। बार-बार ऐसा करना होगा। इच्छाशक्ति द्वारा मन को संयम कर, उसे …
Read More »(भाग: 340) ब्रह्मभोज कराने के नैसर्गिक लाभ
(भाग: 340) ब्रह्मभोज कराने के नैसर्गिक लाभ टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट वैदिक सनातन धर्म शास्त्र के अनुसार जन सामान्य ब्रह्म भोजन करवाने के नियम और नैसर्गिक लाभ के संबंध पर प्रकाश डाल रहे हैं! ब्राह्मण के लिए भोजन को पवित्रता और शुद्धता से बनाना चाहिए और उसमें भूलकर भी लहसुन, प्याज आदि का प्रयोग नहीं करना चाहिए. धार्मिक मान्यता …
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