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धार्मिक

मनसेतर्फे रामटेक शहरातील रथयात्रा व शोभायात्रेनिमित्त भोजनदान कार्यक्रम

  प्रभु श्री रामाच्या चरणस्पर्शाने पावन झालेल्या रामटेक शहरात दरवर्षी होणाऱ्या रथयात्रा व शोभायात्रे निमित्त तसेच तालुक्यात होणाऱ्या मंडई कार्यक्रमाच्या उपलक्षाने रामटेक तालुका व बाहेरील असंख्य नागरिक शहरात येत असल्याचे चित्र शहरात अनुभवल्या जाते याच निमित्ताने महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना पक्षाचे रामटेक विधासभा क्षेत्रातील जिल्ह्याध्यक्ष श्री. शेखर दुंडे व असंख्य पदाधिकार्यांच्या मदतिने दि. २५ नोव्हेंबर रोज शनिवारला शहरातील शनिवारी वार्ड परिसरातील …

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(भाग:171) जिनका अंत:करण ज्ञान विज्ञान अर्थात तत्वज्ञान से तृप्त है उसीका जीवन धन्य!

भाग:171) जिनका अंत:करण ज्ञान विज्ञान अर्थात तत्वज्ञान से तृप्त है उसीका जीवन धन्य है। टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट अनाश्रितः, कर्मफलम्, कार्यम्, कर्म, करोति, यः, सः, सन्यासी, च, योगी, च, न, निरग्निः, न, च, अक्रियः।।1।। अनुवाद: (यः) जो साधक (कर्मफलम्) कर्मफलका (अनाश्रितः) आश्रय न लेकर (कार्यम्) शास्त्र विधि अनुसार करनेयोग्य (कर्म) भक्ति कर्म (करोति) करता है (सः) वह (सन्यासी) सन्यासी …

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(भाग :170)गीता में श्रीकृष्ण कहते है जो मेरी शरण में आता है उसका कभी विनाश नहीं होता है।

भाग :170)गीता में श्रीकृष्ण कहते है जो मेरी शरण में आता है उसका कभी विनाश नहीं होता है। टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट अवधूूत गीता मं निम्नलिखित पंक्ति का अर्थ है कि अकर्म से विकर्म की प्राप्ति। जिसका अर्थ है भगवान के दिए ज्ञान को प्राप्त करके कर्म करना और उन कर्मों से कुछ ऐसा कर जाना जिससे विशेष कर्म …

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(भाग:168) अधर्म का विनाश और धर्म की स्थापना करने के लिये मैं युग-युग में प्रकट हुआ करता हूँ

भाग:168) अधर्म का विनाश और धर्म की स्थापना करने के लिये मैं युग-युग में प्रकट हुआ करता हूँ ।। ८ टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट श्रीकृष्ण कहते है हे अर्जुन ! मेरे जन्म और कर्म दिव्य अर्थात् निर्मल और अलौकिक हैं —- इस प्रकार जो मनुष्य तत्त्व से जान लेता है, वह शरीर को त्याग कर फिर जन्म को प्राप्त …

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(भाग:167) पूर्ण ज्ञान के अभाव में अज्ञान अंधकार में डूबे अल्प ज्ञानी लोग व्यथित भ्रम मे भटकते रह जाते है

भाग:167) पूर्ण ज्ञान के अभाव में अज्ञान अंधकार में डूबे अल्प ज्ञानी लोग व्यथित भ्रम मे भटकते रह जाते है टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट इमं विवस्वते योगं प्रोक्तवानहमव्ययम्‌ । विवस्वान्मनवे प्राह मनुरिक्ष्वाकवेऽब्रवीत्‌ ॥ (१) भावार्थ : श्री भगवान ने कहा – मैंने इस अविनाशी योग-विधा का उपदेश सृष्टि के आरम्भ में विवस्वान (सूर्य देव) को दिया था, विवस्वान ने …

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(भाग :110) गीता ज्ञानेश्वरी के अनुसार जिनकी इंद्रियों के उपद्रव नष्ट हो जाते हैं शांतिप्रिय है वही आत्मज्ञानी

भाग :110) गीता ज्ञानेश्वरी के अनुसार जिनकी इंद्रियों के उपद्रव नष्ट हो जाते हैं शांतिप्रिय है वही आत्मज्ञानी टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:सह-संपादक की रिपोर्ट गीता ज्ञानेश्वरी के अनुसार योगी लोग इन मानस नोश दाणा करते हैं, परम्तु उनके मनमें ह बावका स्पर्श भी नहीं होता, इसलिए वे कर्म उनके लिए बन्धक नहीं होते। जिस समय कोई मनुष्य पिशाचके चित्तके समान भ्रमिष्ट …

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(भाग:109)श्रीमद्-भगवद गीता के अध्ययन मनन से मन की मलिनता और अहंकार का नाश!

भाग:109)श्रीमद्-भगवद गीता के अध्ययन मनन से मन की मलिनता और अहंकार का नाश! टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:सह-संपादक की रिपोर्ट ‘ज्ञानेश्वरी’ में ‘गीता’ के मूल 700 श्लोकों का मराठी भाषा की 9000 ओवियों में अत्यंत रसपूर्ण विशद विवेचन है। अंतर केवल इतना ही है कि यह शंकराचार्य के समान ‘गीता’ का प्रतिपद भाष्य नहीं है। यथार्थ में यह ‘गीता’ की भावार्थदीपिका है। …

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(भाग:107)आत्मनिर्भरता के संघर्ष में प्रेरणा स्रोत रही श्रीमद-भगवत गीता? लोकमान्य तिलक के विचार

भाग:107)आत्मनिर्भरता के संघर्ष में प्रेरणा स्रोत रही श्रीमद-भगवत गीता? लोकमान्य तिलक के विचार टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:सह-संपादक की रिपोर्ट श्रीमद्-भगवत गीता के सन्देश के प्रचार प्रसार में डाक विभाग का भी बड़ा योगदान रहा है. 1978 में भगवद्गीता पर जारी पहले स्मारक डाक टिकट की 50 लाख प्रतियां छापी गयी थीं. आज़ादी के अमृत महोत्सव के ज़रिये हम अपनी स्वतंत्रता के …

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जानिए देवी-देवताओं के वैदिक और अमोघ मंत्र शक्तियों का चमत्कार

जानिए देवी-देवताओं के वैदिक और अमोघ मंत्र शक्तियों का चमत्कार टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:सह-संपादक की रिपोर्ट हमारे वैदिक सनातन धर्म शास्त्रों के अनुसार देवी- देवताओं के मंत्रों में अपार शक्ति हैं । कई मंत्र ऐसे होते जिनके जपने से हमारे संकट दूर हो जाते हैं। आइए जानें अलग अलग देवताओं के अलग अलग मंत्रों के बारे में। धर्मग्रंथों के अनुसार ताकत, …

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(भाग:106) नैसर्गिक नियमों का पालन एवं धर्म की रक्षा करते हुए जीवन यापन करना ही संपूर्ण गीता सार है।

(भाग:106) नैसर्गिक नियमों का पालन एवं धर्म की रक्षा करते हुए जीवन यापन करना ही संपूर्ण गीता सार है। टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:सह-संपादक की रिपोर्ट श्रीमद्-भगवत गीता में 18 अध्याय हैं और यह संस्कृत में परमात्मा द्वारा दी गई थी। समय के साथ संस्कृत भाषा रोजमर्रा की जिंदगी से निकल गई और यह ज्ञान मनुष्य से दूर हो गया। समय-समय पर …

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