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धार्मिक

ख्रिसमस अर्थात प्रेम, मानवतेचा संदेश

येशू ख्रिस्ताचा जन्मदिवस म्हणून साजरा केला जाणारा नाताळ होय. त्याच्या पुनरुत्थानाचा दिवस म्हणून साजरा केला जाणारा ईस्टर हे दोन महत्त्वाचे सण होत. नाताळ हा मूलतः प्रेमाचा संदेश देणारा सण आहे. ख्राईस्ट मास अर्थात ख्रिस्त जन्मानिमित्त केली जाणारी सामूहिक प्रार्थना म्हणजेच ख्रिसमस होय. ही प्रार्थना अखिल मानवजातीच्या कल्याणासाठी आहे. येशू ख्रिस्ताने सामान्य माणसाच्या आयुष्याला नवे आणि आध्यात्मिक वळण दिले. येशूंनी दिलेला …

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अयोध्या राम मंदिर प्राणप्रतिष्ठा के लिए पूजित अक्षत कलश शोभा यात्रा के साथ महादुला-कोराडी में अच्छत वितरण कार्यक्रम

अयोध्या राम मंदिर प्राणप्रतिष्ठा के लिए पूजित अक्षत कलश शोभा यात्रा के साथ महादुला-कोराडी में अच्छत वितरण कार्यक्रम टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट कोराडी। अयोध्या में 22 जनवरी को श्रीरामलला की प्राण प्रतिष्ठा होने वाली है। भव्य मंदिर बनकर तैयार हो रहा है। इस पावन अवसर पर होने वाली खुशी अब महाराष्ट्र राज्य नागपुर जिले के कोराडी-महादुला में दिखने लगी …

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(भाग:188) भगवान गौतम के उपदेश:अपने ऊपर दुख को कभी खुद पर हावी न होने दें

भाग:188) भगवान गौतम के उपदेश:अपने ऊपर दुख को कभी खुद पर हावी न होने दें टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट भगवान गौतम बुद्ध कहना है कि हर इंसान को ये समझना चाहिए कि कोई भी दुख हमेशा नहीं रहता है, उसको खत्म किया जा सकता है। दुख निवारण का उपाय है: बुद्ध का कहना है कि हर दुख को दूर …

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(भाग:187)भगवान गौतम बुद्ध द्वारा उपदेशित चार महान सत्य हैं कि यह जीवन दुख से भरा है

(भाग:187)भगवान गौतम बुद्ध द्वारा उपदेशित चार महान सत्य हैं कि यह जीवन दुख से भरा है टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट भगवान सिद्धार्थ गौतम बुद्ध कहते है कि जीवन दुःख-समुदाय से भरा हुआ है और,दुख को रोकना संभव है ( दुःख-निरोधा ), और एक रास्ता है दुख को दूर करने के लिए ( दुःख-निरोध-मार्ग )। दुखों को दूर करने के …

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(भाग:186) महात्मा सिद्धार्थ गौतम को बुद्धत्व का ज्ञान प्राप्त हुआ इसलिए वे भगवान बुद्ध कहलाए

भाग:186) महात्मा सिद्धार्थ गौतम को बुद्धत्व का ज्ञान प्राप्त हुआ इसलिए वे भगवान बुद्ध कहलाए टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट बौधगया । महात्मा सिद्धार्थ गौतम को बुद्धत्व कि प्राप्ति हुई, इसलिए वे भगवान बुद्ध कहलाए। इसका मतलब उन्होंने दुःख के बारें में चिंतन-मनन किया, प्रयोग किये उसके बाद उनको जो दुःख मुक्ति का मार्ग ढूंढ निकाला (अरिय अष्टांगिक मार्ग), चार …

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(भाग:185) बुद्ध द्वारा उपदेशित चार महान सत्य हैं कि जीवन दुख से भरा है और दुख को रोकना संभव है

भाग:185) बुद्ध द्वारा उपदेशित चार महान सत्य हैं कि जीवन दुख से भरा है और दुख को रोकना संभव है टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट सिद्धार्थ गौतम बुद्ध कहते हैं कि यह संसार दु:ख से व्यथित है और दुख को दूर करने के लिए ( दुःख-निरोध-मार्ग )यानी दुखों को दूर करने के तरीके के रूप में बुद्ध द्वारा समर्थित आठ …

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(भाग:184) मनुष्य को अध:पतन की ओर ले जाने वाले बुरे कर्मों की विस्तारपूर्वक व्याख्या की थी भगवान बुद्ध ने

भाग:184) मनुष्य को अध:पतन की ओर ले जाने वाले बुरे कर्मों की विस्तारपूर्वक व्याख्या की थी भगवान बुद्ध ने टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट बौधगया। धर्म कीर्ति आज से लगभग ढाई हजार वर्ष पूर्व भगवान बुद्ध ने बुरे कर्मों की विस्तारपूर्वक व्याख्या की थी। एक समय बुद्ध श्रावस्ती में सेठ अनाथ पिंडिक द्वारा निर्मित जेतवनाराम मठ में वर्षावास कर रहे …

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(भाग:183) गीता में कर्म के फल का महत्व ? मनुष्य को कर्मो का फल भोगना ही पड़ता है और कैसे मिलता है कर्म फल|

भाग:183) गीता में कर्म के फल का महत्व ? मनुष्य को कर्मो का फल भोगना ही पड़ता है और कैसे मिलता है कर्म फल| टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट मनुष्य को कर्मो का फल भुगतना ही पडता है। आज इस लेख में हम कर्मों का फल अवश्य ही भुगतना पड़ता है, क्योंकि इंसान ही अच्छे और बुरे कर्म करता है, …

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(भाग:182) सांसारिक विषय वासनाओं का त्याग से होगी ईश्वर की प्राप्ति?श्री कृष्ण ने गीता में अर्जुन को दिखाया था मार्ग।

भाग:182) सांसारिक विषय वासनाओं का त्याग से होगी ईश्वर की प्राप्ति?श्री कृष्ण ने गीता में अर्जुन को दिखाया था मार्ग। टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट आप मन को सभी तरह के भय से हटाकर भगवान श्री कृष्ण की भक्ति में लगाएं और चिंतन करें, जिससे मन में एकाग्रता आएगी। आप कृष्णमय हो जायेंगे व भगवान की कृपा होगी। ईश्वर को …

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(भाग:181) गीता के अनुसार नैतिक मूल्यों में गिरावट की वजह है संस्कार हीनता और अधपतन

भाग:181) गीता के अनुसार नैतिक मूल्यों में गिरावट की वजह है संस्कार हीनता और अधपतन टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट गीता मनुष्य को जीने की कला सिखाती है। यह मनुष्य को दुःख-सुख, हानि-लाभ, हार-जीत आदि में सन्तुलित रहकर कर्म करने का महान् सन्देश देती है। इसलिए गीता के उपदेश को ”नैतिक मूल्यों व दर्शन” में मानवीय जीवन की कठिनाईयों के …

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