अयोध्या राम मंदिर प्राणप्रतिष्ठा के लिए पूजित अक्षत कलश शोभा यात्रा के साथ महादुला-कोराडी में अच्छत वितरण कार्यक्रम टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट कोराडी। अयोध्या में 22 जनवरी को श्रीरामलला की प्राण प्रतिष्ठा होने वाली है। भव्य मंदिर बनकर तैयार हो रहा है। इस पावन अवसर पर होने वाली खुशी अब महाराष्ट्र राज्य नागपुर जिले के कोराडी-महादुला में दिखने लगी …
Read More »(भाग:188) भगवान गौतम के उपदेश:अपने ऊपर दुख को कभी खुद पर हावी न होने दें
भाग:188) भगवान गौतम के उपदेश:अपने ऊपर दुख को कभी खुद पर हावी न होने दें टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट भगवान गौतम बुद्ध कहना है कि हर इंसान को ये समझना चाहिए कि कोई भी दुख हमेशा नहीं रहता है, उसको खत्म किया जा सकता है। दुख निवारण का उपाय है: बुद्ध का कहना है कि हर दुख को दूर …
Read More »(भाग:187)भगवान गौतम बुद्ध द्वारा उपदेशित चार महान सत्य हैं कि यह जीवन दुख से भरा है
(भाग:187)भगवान गौतम बुद्ध द्वारा उपदेशित चार महान सत्य हैं कि यह जीवन दुख से भरा है टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट भगवान सिद्धार्थ गौतम बुद्ध कहते है कि जीवन दुःख-समुदाय से भरा हुआ है और,दुख को रोकना संभव है ( दुःख-निरोधा ), और एक रास्ता है दुख को दूर करने के लिए ( दुःख-निरोध-मार्ग )। दुखों को दूर करने के …
Read More »(भाग:186) महात्मा सिद्धार्थ गौतम को बुद्धत्व का ज्ञान प्राप्त हुआ इसलिए वे भगवान बुद्ध कहलाए
भाग:186) महात्मा सिद्धार्थ गौतम को बुद्धत्व का ज्ञान प्राप्त हुआ इसलिए वे भगवान बुद्ध कहलाए टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट बौधगया । महात्मा सिद्धार्थ गौतम को बुद्धत्व कि प्राप्ति हुई, इसलिए वे भगवान बुद्ध कहलाए। इसका मतलब उन्होंने दुःख के बारें में चिंतन-मनन किया, प्रयोग किये उसके बाद उनको जो दुःख मुक्ति का मार्ग ढूंढ निकाला (अरिय अष्टांगिक मार्ग), चार …
Read More »(भाग:185) बुद्ध द्वारा उपदेशित चार महान सत्य हैं कि जीवन दुख से भरा है और दुख को रोकना संभव है
भाग:185) बुद्ध द्वारा उपदेशित चार महान सत्य हैं कि जीवन दुख से भरा है और दुख को रोकना संभव है टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट सिद्धार्थ गौतम बुद्ध कहते हैं कि यह संसार दु:ख से व्यथित है और दुख को दूर करने के लिए ( दुःख-निरोध-मार्ग )यानी दुखों को दूर करने के तरीके के रूप में बुद्ध द्वारा समर्थित आठ …
Read More »(भाग:184) मनुष्य को अध:पतन की ओर ले जाने वाले बुरे कर्मों की विस्तारपूर्वक व्याख्या की थी भगवान बुद्ध ने
भाग:184) मनुष्य को अध:पतन की ओर ले जाने वाले बुरे कर्मों की विस्तारपूर्वक व्याख्या की थी भगवान बुद्ध ने टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट बौधगया। धर्म कीर्ति आज से लगभग ढाई हजार वर्ष पूर्व भगवान बुद्ध ने बुरे कर्मों की विस्तारपूर्वक व्याख्या की थी। एक समय बुद्ध श्रावस्ती में सेठ अनाथ पिंडिक द्वारा निर्मित जेतवनाराम मठ में वर्षावास कर रहे …
Read More »(भाग:183) गीता में कर्म के फल का महत्व ? मनुष्य को कर्मो का फल भोगना ही पड़ता है और कैसे मिलता है कर्म फल|
भाग:183) गीता में कर्म के फल का महत्व ? मनुष्य को कर्मो का फल भोगना ही पड़ता है और कैसे मिलता है कर्म फल| टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट मनुष्य को कर्मो का फल भुगतना ही पडता है। आज इस लेख में हम कर्मों का फल अवश्य ही भुगतना पड़ता है, क्योंकि इंसान ही अच्छे और बुरे कर्म करता है, …
Read More »(भाग:182) सांसारिक विषय वासनाओं का त्याग से होगी ईश्वर की प्राप्ति?श्री कृष्ण ने गीता में अर्जुन को दिखाया था मार्ग।
भाग:182) सांसारिक विषय वासनाओं का त्याग से होगी ईश्वर की प्राप्ति?श्री कृष्ण ने गीता में अर्जुन को दिखाया था मार्ग। टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट आप मन को सभी तरह के भय से हटाकर भगवान श्री कृष्ण की भक्ति में लगाएं और चिंतन करें, जिससे मन में एकाग्रता आएगी। आप कृष्णमय हो जायेंगे व भगवान की कृपा होगी। ईश्वर को …
Read More »(भाग:181) गीता के अनुसार नैतिक मूल्यों में गिरावट की वजह है संस्कार हीनता और अधपतन
भाग:181) गीता के अनुसार नैतिक मूल्यों में गिरावट की वजह है संस्कार हीनता और अधपतन टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट गीता मनुष्य को जीने की कला सिखाती है। यह मनुष्य को दुःख-सुख, हानि-लाभ, हार-जीत आदि में सन्तुलित रहकर कर्म करने का महान् सन्देश देती है। इसलिए गीता के उपदेश को ”नैतिक मूल्यों व दर्शन” में मानवीय जीवन की कठिनाईयों के …
Read More »(भाग:180) चराचर जगत निर्माता ईश्वर का ध्यान में तल्लीन रहने वाला भक्त भगवान को अतिशय प्रिय है
(भाग:180) चराचर जगत निर्माता ईश्वर का ध्यान में तल्लीन रहने वाला भक्त भगवान को अतिशय प्रिय है टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट (अर्जुन उवाच) एवम्, सततयुक्ताः, ये, भक्ताः, त्वाम्, पर्युपासते, ये, च, अपि, अक्षरम्, अव्यक्तम्, तेषाम्, के, योगवित्तमाः।।1।। अनुवाद: (ये) जो (भक्ताः) भक्तजन (एवम्) पूर्र्वोंक्त प्रकारसे (सततयुक्ताः) निरंन्तर आपके भजन-ध्यानमें लगे रहकर (त्वाम्) आप (च) और (ये) दूसरे जो केवल …
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