भाग:274) पतंजलि ऋषि के अनुसार प्रकृति-निसर्ग परमात्म ने मनुष्य को निम्न 5 प्रकार के क्लेश दिए हैं टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट पतंजलि ऋषि के कथनानुसार निसर्ग-प्रकृति परमात्मा ने मनुष्य को 5 प्रकार के निम्नानुसार क्लेश दिए हैं? क्लेश का मतलब है : दुक्ख, कष्ट ; वेदना, कष्ट पूर्ण मानसिक स्थिति, मनोव्यथा। उग्र या बहुत कष्टदायक पीड़ा विशेषतः हार्दिक या …
Read More »(भाग:273) चित्रकूट तीर्थ के कण-कण में मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम होने के मिले है प्रमाण
भाग:273) चित्रकूट तीर्थ के कण-कण में मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम होने के मिले है प्रमाण टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट चित्रकूट । जानकी चरण मंदिर के पास निकले पत्थरों में लिखा मिला राम व जानकी चरण मंदिर के पास जेसीबी से खोदाई में कई पत्थर निकले हैं। पुजारी ने पत्थरों में राम नाम व ऊं लिखा होने की बात कहकर …
Read More »(भाग:272) मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के आचरण और चरित्र का अनुसरण व अनुकरण करने वाला होता है रामभक्त
भाग:272) मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के आचरण और चरित्र का अनुसरण व अनुकरण करने वाला होता है रामभक्त टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम ने अपने आचरणों से हर किसी के लिए एक कीर्तिमान उदाहरण स्थापित किया है. प्रभु श्री राम एक आदर्श मनुष्य,पुत्र,भाई और पति होने के साथ-साथ एक आदर्श कुशल शासक भी थे. उनके शासन काल …
Read More »(भाग:271) संसार क्षणभंगुर है, संपूर्ण सृष्टि परिवर्तन और विनाश के मूलाधार पर टिकी है
भाग:271) संसार क्षणभंगुर है, संपूर्ण सृष्टि परिवर्तन और विनाश के मूलाधार पर टिकी है टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट योग वशिष्ठ एक हिंदू आध्यात्मिक ग्रंथ है, जो पवित्र ग्रंथ रामायण के लेखक महर्षि वाल्मीकि ने लिखा है। कुछ विद्वानों का मानना है कि यह मानव मन में उठने वाले सभी सवालों के जवाब यह ग्रंथ दे सकता है और मोक्ष …
Read More »(भाग:270) वीर सावरकर योगवासिष्ट रामायण से अत्यन्त प्रभावित थे और उन्होने इसकी भूरि-भूरि प्रशंसा की है।
भाग:270) वीर सावरकर योगवासिष्ट रामायण से अत्यन्त प्रभावित थे और उन्होने इसकी भूरि-भूरि प्रशंसा की है। टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट योगविशिष्ठ के फारसी अनुवाद की एक पाण्डुलिपि (१६०२ ई) से लिया गया चित्र जिसमे कार्कटी किरातराज से प्रश्नोत्तर करतीं है विद्वत्जनों का मत है कि सुख और दुख, जरा और मृत्यु, जीवन और जगत, जड़ और चेतन, लोक और …
Read More »(भाग:269) महान विचारवान को आत्म-मंथन से मिलता है आत्मज्ञान: योगवासिष्ट का कथन
भाग:269) महान विचारवान को आत्म-मंथन से मिलता है आत्मज्ञान: योगवासिष्ट का कथन टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट योगवासिष्ट रामायण के अनुसार महान विचारवाा को आत्ममंथन से प्राप्त होता है आत्मज्ञान और आत्मविचार के संबंध में रमण महर्षि भी विचार की उपयोगिता पर बड़ा महत्व देते थे। पर वशिष्ठ या रमण अगर विचार कहें, तो जो हमारा साधारण, विक्षिप्त विचार है, …
Read More »(भाग:268)जानिए मानवीय जीवन में अध्यात्म विज्ञान का आलौकिक महत्व क्या है
भाग:268)जानिए मानवीय जीवन में अध्यात्म विज्ञान का आलौकिक महत्व क्या है टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट मनुष्य की मूल प्रकृति निर्दोष, सहज और आनंद से परिपूर्ण जीवन जीना है, जबकि आज मनुष्य का जीवन यंत्रों और उपकरणों पर निर्भर हो गया है। इसलिए मनुष्य को आवश्यकताओं के अनुकूल ग्रहण करना चाहिए और इससे आगे कोई लालसा नहीं रखनी चाहिए। यही …
Read More »भाग:267) मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का भगवान विष्णु रुप में विलीन होकर साकेत-वैकुण्ठ धाम गमन
भाग:267) मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का भगवान विष्णु रुप में विलीन होकर साकेत-वैकुण्ठ धाम गमन टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के साकेत धाम यानी वैकुण्ठ लोक गमन के समय उनकी उम्र कितनी थी? अर्थात दरअसल में वो करीब 112 दिव्य वर्षों तक जीवित रहे। श्रीराम और माता सीता के विषय मे वाल्मीकि रामायण मे कहा गया है …
Read More »(भाग:266) मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने लव-कुश राजतिलक करके सौंपी दी कौशलपुुर की कमान
भाग:266) मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने लव-कुश राजतिलक करके सौंपी दी कौशलपुुर की कमान टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट कालिदास के रघुवंश पुराण के अनुसार श्रीरामजी ने अपने पुत्र लव को शरावती तो कुश को कुशावती राज्य सौंपा. लव का राज्य उत्तर भारत में था तो कुश का राज्य दक्षिण कौशलपुर में. कुश की राजधानी कुशावती आज के बिलासपुर जिले में …
Read More »(भाग:265) अपने पुत्र लव-कुश को जन्म शिक्षा और संस्कार देकर अंतत: माता सीता धरती में समा गई?
भाग: 265) अपने पुत्र लव-कुश को जन्म शिक्षा और संस्कार देकर अंतत: माता सीता धरती में समा गई? टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट देवी सीता माता धरती से ही प्रकट हुई थीं और अंत में धरती में ही समा गईं। जिस स्थान पर देवी सीता भूमि में समाई थीं उस स्थान को लेकर कई तरह की मान्यताएं हैं। एक मान्यता …
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