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धार्मिक

(भाग:234) लंका विजय से पहले मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम को क्यों बदलनी पड़ी रामसेतु की जगह

भाग:234) लंका विजय से पहले मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम को क्यों बदलनी पड़ी रामसेतु की जगह टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट पौराणिक कथाओं के अनुसार श्रीराम को लंकाविजय के लिए समुद्र सेतु बनाना पड़ा था. रामजी वानर सेना का गठन कर समुद्र तट पर पहुंचे तो यहां पुल निर्माण की संभावना न देखकर रामेश्वर कूच करना पड़ा. रामायण के अनुसार भगवान …

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(भाग:233) मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने राम रामेश्वरम् की स्थापना करके ही की थी श्रीलंका में चढाई 

भाग:233) मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने राम रामेश्वरम् की स्थापना करके ही की थी श्रीलंका में चढाई टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट सीता को लंका से छुड़ाने के लिए श्री राम ने रामेश्वरम की स्थापना और शिव जी की-पूजा अर्चना की थी। ऐसा माना जाता है कि भगवान श्री राम ने श्रीलंका से लौटते समय इस स्थान पर भगवान शिव की …

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(भाग:232)समुद्र से तीन दिनों तक आग्रह करने के बाद जब श्रीराम ने कहा, “भय बिनु होई न प्रीति”

भाग:232)समुद्र से तीन दिनों तक आग्रह करने के बाद जब श्रीराम ने कहा, “भय बिनु होई न प्रीति” टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम का जीवन आदर्श और कर्तव्यों पर आधारित है इसलिए उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है। रामचरित मानस के द्वारा तुलसीदास ने प्रभु श्रीराम के जीवन से उनके आदर्शों को सीखने का संदेश दिया …

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🚩झूठ छल कपट विश्वाशघात धोखाधडी बेईमानी, अन्याय और भ्रष्टाचार से कमाया धन जीवन में अशांति पैदा करता है

🚩झूठ छल कपट विश्वाशघात धोखाधडी बेईमानी, अन्याय और भ्रष्टाचार से कमाया धन जीवन में अशांति पैदा करता है टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट 🚩ऋषि चाणक्य कहते हैं कि जो धन झूठ छल, कपट, विस्वासघात,धोखाधडी, बेईमानी, अन्याय और भ्रष्टाचार से कमाया है वह जीवन में अशांति और बेचैनी पैदा करता है। ऐसे धन को धर्म के काम में लगाने का औचित्य …

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(भाग:231) हनुमान जी की सीख:बड़े काम की शुरुआत करने से पहले घर-परिवार के बड़े लोगों का आशीर्वाद जरूर लें

(भाग:231) हनुमान जी की सीख:बड़े काम की शुरुआत करने से पहले घर-परिवार के बड़े लोगों का आशीर्वाद जरूर लें टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट श्रीमद रामायण के अनुसार किसी भी काम की शुरुआत करने से पहले घर-परिवार और समाज के बड़े लोगों का आशीर्वाद और सलाह जरूर लेनी चाहिए। ऐसा करने से सकारात्मकता के साथ ही काम करने का साहस …

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(भाग:230)श्रीलंका दहन से पहले हनुमानजी महाराज ने किया था रावण के पुत्र अक्षय कुमार का वध

भाग:230)श्रीलंका दहन से पहले हनुमानजी महाराज ने किया था रावण के पुत्र अक्षय कुमार का वध टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट वाल्मीकि रामायण के उत्तर कांड में स्वयं भगवान श्रीराम ने अगस्त्य मुनि से कहा है कि हनुमान के पराक्रम से ही उन्होंने रावण पर विजय प्राप्त की है। हनुमान अष्टमी के अवसर पर हम आपको हनुमानजी द्वारा किए गए …

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निष्ठापूर्वक महामृत्युंजय मंत्र जाप से अनिष्ठ व्याधिदोष,नवग्रह शांति और शुद्धीकरण अनुष्ठान से सफलता का योग

निष्ठापूर्वक महामृत्युंजय मंत्र जाप से अनिष्ठ व्याधिदोष,नवग्रह शांति और शुद्धीकरण अनुष्ठान से सफलता का योग टेकचंद्र शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट संसार भर में गलत राह में भटकने और नैसर्गिक नियम विरुद्ध आचरण और कार्यप्रणालियों की वजह शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य से जुडी अक्षमताओं को अनिष्ठ सूतक पातक महापाप ग्रह व्याधिदोष कहते हैं।। अपवाद रुप मै ऐसा भी संभव है कि परिस्थिति …

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संसार में बेदाग,निष्कलंक, निष्पाप जीवन यापन से नव युवा महिलाएं-पुरुषगण निसर्ग के लिए वरदान

संसार में बेदाग,निष्कलंक, निष्पाप जीवन यापन से नव युवा महिलाएं-पुरुषगण निसर्ग के लिए वरदान टेकचंद्र शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट मानव समाज की होनहार नव युवा पीढी जिन महिलाएं एवं पुरुषगणों का जीवन काल बेदाग,निष्कलंक और निष्पाप रहा है ऐसे भगवतप्रिय गण धरती माता के लिए वरदान से कम नहीं हैं।निष्कलंक और निष्पाप किशोरी युवक युवतियों पर कभी भी किसी भी प्रकार …

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(भाग:229) जब बजरंगबली श्री हनुमान जी महाराज ने माता सीता जी को अंगूठी भेंट किया तो उनका शोक और दुख दूर हुआ 

भाग:229) जब बजरंगबली श्री हनुमान जी महाराज ने माता सीता जी को अंगूठी भेंट किया तो उनका शोक और दुख दूर हुआ टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट लंकिनी के पास से चल कर वीरवर हनुमान जी, सीता जी की खोज करने लगे। उन्होंने रावण के महल का कोना-कोना छान डाला किन्तु कहीं भी उन्हें सीता जी के दर्शन नहीं हुए। …

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(भाग:228) हनुमानजी महराज ने माता सीताजी को अशोक वाटिका में बैठे देखा था तो आंखों से आंसू आ गए थे.

भाग:228) हनुमानजी महराज ने माता सीताजी को अशोक वाटिका में बैठे देखा था तो आंखों से आंसू आ गए थे टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट रामायण के अनुसार महावीर हनुमान जब सीताजी की खोज में लंका पहुंचे थे, वहां की शोभा और माया देखकर उन्‍हें बड़ा अचरज हो रहा था. पहली बात तो यह थी कि लंकानगरी में बिना आज्ञा …

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